ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ग्रहों का शुभ अशुभ प्रभाव आपके जीवन को कई तरह से प्रभावित करता है जिसका असर आपकी सेहत पर भी होता है। माना जाता है कि जिन लोगों की कुंडली में शुक्र ग्रह कमजोर होता है उन्हें डायबिटीज और आंखों से जुड़े हो सकते हैं।
ज्योतिष शास्त्र में नवग्रहों का बड़ा महत्त्व बताया गया है। ये नवग्रह आपके जीवन पर अलग-अलग प्रभाव डालते हैं। ज्योतिष के मुताबिक जहां कुंडली में ग्रहों की मजबूत स्थिति व्यक्ति के जीवन में सफलता और सुख-समृद्धि का कारण होती है, वहीं ग्रहों के अशुभ प्रभाव के कारण व्यक्ति को शारीरिक और मानसिक पीड़ाओं का सामना करना पड़ सकता है। माना जाता है कि हर व्यक्ति के शरीर के विभिन्न अंगों पर अलग-अलग ग्रहों का आधिपत्य होता है। जैसे ज्योतिष शास्त्र के अनुसार वाणी पर गुरु ग्रह का तो कानों पर शनि व मंगल का आधिपत्य होता है। ऐसे में संबंधित ग्रहों के दुष्प्रभाव से अंगों से जुड़े रोग हो सकते हैं। तो आइए जानते हैं कमजोर शुक्र कौन से रोग पैदा करता है और इससे जुड़े उपाय...
शुक्र के कमजोर होने से होने वाले रोग
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार माना जाता है कि यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में शुक्र ग्रह कमजोर होता है तो उसे डायबिटीज, अंगूठे में दर्द, त्वचा, आंखों और जननांग से संबंधित रोग परेशान करते हैं। तो आइए जानते हैं कुंडली में कमजोर शुक्र को कैसे बना सकते हैं बलवान...
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार रोजाना अपने भोजन में से कुछ हिस्सा गाय के लिए जरूर निकालें। इससे शुक्र ग्रह को मजबूती मिलती है।
ज्वार या अन्न का दान करने, गरीब बच्चों या विद्यार्थियों में पढ़ाई की चीजें वितरित करने से भी शुक्र ग्रह शांत होता है।
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार डायबिटीज के रोगियों को कुंडली के कमजोर शुक्र को सफल बनाने के लिए चांदी, कपूर, चावल या कोई सफेद रंग के फूल का दान करने से लाभ मिल सकता है।
कन्याओं को भोजन कराकर आशीर्वाद लेने से और यदि विवाहित हैं तो अपनी पत्नी को प्रसन्न रखने से भी रोग जल्दी ठीक होने की मान्यता है।
शुक्रवार के दिन सफेद चीजें जैसे सफेद वस्त्र, दूध, दही आदि का दान करने से भी शुक्र देव को प्रसन्नता मिलती है। इसके अलावा हर शुक्रवार के दिन सफेद गाय या बैल को चारा खिलाने से भी सकारात्मक परिणाम मिलने की मान्यता है।
(डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई सूचनाएं सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। patrika.com इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ की सलाह ले लें।)
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