
लाल देह लाली लसे, अरु धरि लाल लंगूर... यह चौपाई हनुमानजी को समर्पित है। इसका मतलब होता है कि हनुमान जी ( Hanuman ) लाल रंग का सिंदूर लगाते हैं, शरीर भी जिनका लाल है, जो वज्र के समान बलवान है। वैसे तो हमारे देश में हनुमानजी के कई मंदिर है। आज हम ऐसे हनुमान मंदिर ( Hanuman Temple ) के बारे में बात करेंगे, जहां बजरंगबली लाल नहीं काले हैं। यह अनूठा मंदिर राजस्थान के चांदी के टक्साल में जयमहल के नजदीक स्थित है। इस मंदिर में हनुमान जी की मूर्ति चांदी की है।
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इसके पीछे है पौराणिक कथा
काले हनुमान जी के पीछे पौराणिक कथा है। कहा जाता है कि जब हनुमान जी ने अपनी शिक्षा पूरी कर ली तो गुरु सूर्य से गुरु दक्षिणा देने की बात की। इस गुरु सूर्य ने कहा कि मेरा बेटा शनिदेव ( shani dev ) मेरी बात नहीं मानता है। अगर तुम उसे मेरे पास ला दो तो मैं उसे ही गुरु दक्षिणा समझूंगा। कहा जाता है कि हनुमानजी सूर्य की बात मानकर शनि को लेने चले गए। हनुमानजी को देखते ही शनिदेव क्रोधित हो गए और उन कुदृष्टि डाल दी, जिस कारण उनका रंग काला हो गया। इसके बाद हनुमानजी शनिदेव को पकड़कर सूर्य देव के पास लाए।
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काले हनुमान मंदिर की खासियत
इस मंदिर का स्वरूप मनमोहक है। बाहर से देखने पर यह मंदिर महल जैसा दिखाई देता है। इस मंदिर में भगवान राम के साथ-साथ अन्य देवी-देवताओं के भी प्रतिमा स्थापित हैं। इस मंदिर का निर्माण आमेर के राजा जयसिंह ने करवाया था।