
Maa Brahmacharini : नवरात्र के दूसरे दिन सोमवार को माता ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की जा रही है। साधकों के लिए यह दिन अपने मन को मां भगवती के चरणों में लगाने का होता है। माता ब्रह्मचारिणी, मां दुर्गाजी का दूसरा स्वरूप हैं। उनकी उपासना से भक्तों और साधकों को अनंत फल मिलता है। भविष्य पुराण में मां ब्रह्मचारिणी के सौम्य रूप का उल्लेख किया गया है। उनके एक हाथ में माला और दूसरे हाथ में कमंडल रहता है। माता ब्रह्मचारिणी के नाम का भावार्थ है: तप का आचरण करने वाली। वे सर्वत्र विजय दिलानेवाली देवी हैं।
साधक का आत्मबल बढ़ता है
धर्माचार्य पंडित नरेंद्र नागर बताते हैं कि तप, त्याग, संयम आदि के लिए माता ब्रह्मचारिणी की उपासना का विशेष महत्व है। उनके आशीर्वाद से साधक का आत्मबल बढ़ जाता है।
ब्रह्मचारिणी माता को सफेद रंग प्रिय है। उन्हें गुलाबी रंग भी पसंद है। धार्मिक और ज्योतिषिय ग्रंथों के अनुसार मां ब्रह्मचारिणी केतु ग्रह की अधिष्ठात्री देवी हैं यानि वे केतु को नियंत्रित करती हैं। माता को शक्कर और मिश्री का भोग चढ़ाया जाता है। मां ब्रह्मचारिणी को पंचामृत के साथ प्रसाद के रूप में फल चढ़ाना चाहिए।
माता ब्रह्मचारिणी के नाम का भी विशेष अर्थ है। ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई बताते हैं कि 'ब्रह्म' का अर्थ होता है तपस्या और 'चारिणी' का अर्थ होता है: आचरण करने वाली। इस प्रकार ब्रह्मचारिणी का पूरा अर्थ हुआ: तप का आचरण करने वाली देवी।
नवरात्रि के दूसरे दिन साधक कुंडलिनी शक्ति को जागृत करने की साधना करते हैं। ‘स्वाधिष्ठान ’चक्र में अवस्थित मन वाले साधक को उनकी कृपा प्राप्त होती है।
ब्रह्मचारिणी माता की आराधना के लिए उनका श्लोक कंठस्थ कर लेना चाहिए। विशेष परिणाम प्राप्त करने के लिए नवरात्रि में इसका जाप जरूर करना चाहिए। ब्रह्मचारिणी माता का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए ऐसी कन्याओं को घर में बुलाकर पूजन करना चाहिए जिनका विवाह तय हो गया लेकिन फेरे नहीं हुए हैं। उन्हें भोजन कराकर यथासंभव भेंट भी देना चाहिए।
अर्थ : हे मां! सर्वत्र विराजमान और ब्रह्मचारिणी के रूप में प्रसिद्ध अम्बे, मैं आपको बारंबार प्रणाम करता हूं।