Mahashivratri Puja Vidhi:महाशिवरात्रि के दिन सुबह जल्दी उठकर अपने नित्य-कर्मों से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद शिवशंकर की पूजा के समय मंदिर के समक्ष शुद्ध आसन बिछा लें। पूजा की सारी सामग्री जैसे बेलपत्र, धतूरा, सफेद फूल, पीला चंदन, धूप-दीप आदि को एक थाली में यथास्थान पर रख लें।
शिवरात्रि का त्योहार हर साल में एक बार फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को आता है। महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर भोलेनाथ के भक्त अपने प्रभु को प्रसन्न करने के लिए पूरी श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा करते हैं। जिससे आदियोगी उनके सभी मनोकामनायें पूर्ण कर दें। हिंदू धर्म की मान्यता के अनुसार जो भक्त इस दिन भगवान शिव की पूरे मन से उपासना और व्रत करता है, उसके सब मनोरथ सिद्ध हो जाते हैं। तो आज हम आपको शिवरात्रि पूजा की ऐसी आसान विधि बताने जा रहे हैं जिसे अपनाकर आप भगवान शिव को खुश कर सकते हैं...
शिवरात्री पूजा विधि:
भगवान भोलेनाथ अपने भक्तों की पुकार बड़ी जल्दी सुन लेते हैं। उनकी पूजा का तरीका भी बड़ा ही आसान है। अगर आप शिवरात्रि के दिन मंदिर न जा पाएँ तो घर पर ही शिव जी की मूर्ति अथवा तस्वीर के सामने बैठकर पूजा कर सकते हैं। आप महाशिवरात्रि के दिन सुबह जल्दी उठकर अपने नित्य-कर्मों से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद शिवशंकर की पूजा के समय मंदिर के समक्ष शुद्ध आसन बिछा लें। पूजा की सारी सामग्री जैसे बेलपत्र, धतूरा, सफेद फूल, पीला चंदन, धूप-दीप आदि को एक थाली में यथास्थान पर रख लें।
तत्पश्चात शिवलिंग पर दही, घी, शहद, शक्कर और जल से अभिषेक करें। फिर शिवजी को वस्त्र पहनाएँ। उसके बाद जनेऊ, पुष्पमाला, इत्र, अक्षत, बिल्वपत्र, धतूरा आदि शिवजी पर अर्पित करें। ध्यान रहे कि केतकी के फूल और तुलसी का अर्पण शिवलिंग पर वर्जित माना गया है। साथ ही विभिन्न प्रकार के फल भी भोलेनाथ को चढ़ायें। इतना करने के बाद आपको धूप-दीप से शिवजी की आरती करनी है। साथ ही माता पार्वती, पुत्र गणेश और कार्तिकेय तथा नंदी का भी ध्यान करें। आरती करने के बाद भगवान शिव से अपनी भूल-चूक के लिए क्षमा याचना करें। और फिर सिर झुकाकर, दोनों हाथों को फैलाकर आदियोगी से अपनी इच्छापूर्ति हेतु प्रार्थना करें। महाशिवरात्रि पर इस आसान विधि से पूजा-पाठ करने से भगवान शिवशंकर आपके सारे कष्ट हर लेंगे।
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