धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रुद्राक्ष शिव जी के आंसुओं से बने हैं। इस कारण इन्हें बहुत ही पवित्र और पूजनीय माना जाता है। स्वास्थ्य की दृष्टि से भी इसके फायदे माने गए हैं। वहीं ज्योतिष शास्त्र में भगवान भोलेनाथ को प्रिय रुद्राक्ष धारण करने के कुछ नियम भी बताए गए हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रुद्राक्ष की उत्पत्ति भगवान भोलेनाथ के आंसुओं से मानी गई है। भगवान शिव को बेहद प्रिय होने के कारण रुद्राक्ष को पवित्र और पूजनीय माना जाता है। वहीं मान्यता है कि ये रक्तचाप और हृदय स्वास्थ्य के लिए भी यह फायदेमंद होता है। वहीं ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक अपनी राशि अनुसार रुद्राक्ष धारण करने से गृह दोषों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। लेकिन शुभ फलों की प्राप्ति के लिए रुद्राक्ष धारण करते समय कुछ खास बातों का ध्यान रखना चाहिए। तो आए जानते हैं रुद्राक्ष धारण करने के नियम...
रुद्राक्ष धारण करने के नियम
ध्यान रखें कि रुद्राक्ष धारण करते समय भोलेनाथ के मूल मंत्र ओम नमः शिवाय मंत्र का जाप करना चाहिए।
पवित्र और पूजनीय माने जाने के कारण कभी भी अशुद्ध हाथों से रुद्राक्ष को स्पर्श नहीं करना चाहिए।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार रुद्राक्ष को कभी भी काले धागे में नहीं पहनना चाहिए। हमेशा लाल या पीले रंग के धागे में इसे धारण करना चाहिए। इसके अलावा आप चांदी में जड़वाकर भी रुद्राक्ष को पहना जा सकता है।
जिन लोगों ने रुद्राक्ष धारण किया हुआ है उन्हें कभी भी मांस, मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए।
स्वयं का धारण किया हुआ रुद्राक्ष कभी भी दूसरों को नहीं देना चाहिए या किसी अन्य का रुद्राक्ष भी धारण करना सही नहीं माना जाता।
(डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई सूचनाएं सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। patrika.com इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ की सलाह ले लें।)
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