
Ulte Hanuman Mandir : भारत के सबसे अनोखे हनुमान मंदिर कौन से हैं
Ulte Hanuman Mandir, Famous Hanuman Temples : आपने हनुमान जी के मंदिर तो खूब देखे होंगे कहीं वो गदा लिए खड़े, तो कहीं दोनों हाथ जोड़कर रामजी की भक्ति में डूबे हुए। मगर क्या आपको पता है कि भारत में एक ऐसा मंदिर भी है, जहां हनुमान जी उल्टे सिर के बल खड़े हैं? सुनकर थोड़ा अजीब तो लगता है पर ये हकीकत है। हनुमान जयंती के पावन अवसर पर आइए जानते हैं इंदौर के पास स्थित इस रहस्यमयी मंदिर की कहानी और हनुमान जी के कुछ अन्य अविश्वसनीय स्वरूपों के बारे में।
इंदौर के पास सांवेर में ये अनोखा मंदिर है। इस गांव से इंदौर बस 30 किलोमीटर दूर है। यहां उल्टे हनुमान मंदिर है, जिसे दुनिया में अपनी तरह का अकेला मंदिर माना जाता है. यहां की मूर्ति में हनुमान जी का सिर नीचे और पैर ऊपर की तरफ हैं।
इस चमत्कारी रूप के पीछे एक पुरानी रामायण की कहानी जुड़ी है। रावण और भगवान राम के युद्ध में, रावण का भाई अहिरावण मायावी शक्तियों से राम और लक्ष्मण का अपहरण कर पाताल लोक ले गया। जब हनुमान जी को इसकी खबर लगी, तो उन्होंने उन्हें खोजा। मान्यता है, सांवेर वह जगह है जहां से हनुमान जी ने पाताल लोक की यात्रा शुरू की जिसमें उनका सिर नीचे और पैर ऊपर थे। वहां पहुंचकर हनुमान जी ने अहिरावण का वध किया और भगवान राम-लक्ष्मण को सुरक्षित वापस लाए। इसी विजय और वीरता के प्रतीक स्वरूप यहां उनकी 'उल्टे' रूप में पूजा की जाती है।
मंदिर सिर्फ अपनी अजीब बनावट के लिए नहीं, बल्कि चमत्कारी मान्यताओं की वजह से भी मशहूर है। यहां के लोगों का यकीन है कि जो भी भक्त लगातार तीन या पांच मंगलवार दर्शन करता है, उसकी सबसे बड़ी परेशानी दूर हो जाती है। हनुमान जी को चोला चढ़ाना यहां काफी शुभ माना जाता है लोगों को लगता है मन की मुराद जल्दी पूरी हो जाती है।
हनुमान जी कलयुग के जाग्रत देवता (चिरंजीवी) माने जाते हैं। सांवेर के अलावा देश में कुछ और भी ऐसे मंदिर हैं जो आस्था की नई परिभाषा लिखते हैं
प्रयागराज के लेटे हनुमान मंदिर की विशाल मूर्ति, संगम किनारे लेटी हुई मुद्रा में है। मान्यता यही है कि लंका विजय के बाद हनुमान जी थककर बेहोश हो गए थे, तब माता सीता ने उन्हें सिंदूर दिया और जीवनदान मिला। संगम स्नान तब तक पूरा नहीं माना जाता जब तक इनका दर्शन न लें।
छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में कद बढ़ते हनुमान जी का मंदिर है लोग मानते हैं मूर्ति हर साल थोड़ी बढ़ जाती है। ये मूर्ति एक पुराने पेड़ से प्रकट हुई थी।
अयोध्या की हनुमान गढ़ी में हनुमान जी को नगर का रक्षक माना जाता है। रामलला के दर्शन से पहले यहां 76 सीढ़ियां चढ़कर हनुमान जी की आज्ञा लेना जरूरी होता है।
कर्नाटक के हम्पी में अंजनाद्रि पर्वत जहां हनुमान जी का जन्मस्थान माना जाता है। यहां 575 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं और ऊपर से पूरा हम्पी दिव्य लोक जैसा लगता है।
सांवेर के उल्टे हनुमान हों या प्रयागराज के लेटे हनुमान, हर मंदिर हनुमान जी की शक्ति और भक्ति का अहसास कराता है. अगर आपका मन परेशान है, या जीवन में कोई मुश्किल दौर चल रहा है, तो कभी इन संकट मोचन के मंदिर में जाकर माथा टेकिये कौन जानता, आपके कष्टों का अंत यहीं लिखा हो।
अस्वीकरण (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। यहां दी गई ज्योतिष, वास्तु या धार्मिक जानकारी मान्यताओं और विभिन्न स्रोतों पर आधारित है। हम इसकी पूर्ण सटीकता या सफलता की गारंटी नहीं देते हैं। किसी भी उपाय, सलाह या विधि को अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के प्रमाणित विशेषज्ञ या विद्वान से परामर्श अवश्य लें।
Published on:
01 Apr 2026 12:45 pm
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