
Ahoi Ashtami : कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को अहोई अष्टमी कहा जाता है। इस दिन माताएं, अपनी संतान की लंबी आयु और खुशहाल जीवन की कामना से व्रत रखती हैं। अहोई अष्टमी पर माता अहोई की पूजा का विधान है। इस दिन व्रत सूर्योदय से प्रारंभ हो जाता है और चंद्रमा अथवा तारों को अर्घ्य देकर इसका पारण किया जाता है। इस बार कार्तिक कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि दो दिन पड़ रही है। ऐसे में अहोई अष्टमी व्रत पर भ्रम पैदा हो गया है। हालांकि धर्माचार्यों और ज्योतिषाचार्यों ने शास्त्रोक्त विधि से इस असमंजस को दूर कर दिया है।
ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई बताते हैं कि महिलाएं, अहोई अष्टमी का व्रत अपनी संतान की स्वास्थ्य रक्षा, कामयाबी और खुशहाल जीवन की कामना से रखती हैं। दिनव्रत रखा जाता है। कार्तिक कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को ही यह व्रत पड़ता है।
अहोई अष्टमी व्रत मातृत्व शक्ति, संतान की सुरक्षा और कर्मफल से मुक्ति का प्रतीक माना गया है। यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि मां के निश्चल प्रेम और संतान के सुख के लिए मनाया जाने वाला दिव्य पर्व है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखकर अहोई माता की पूजा करने से उनकी कृपा से संतान संबंधी सभी सुख प्राप्त होते हैं, उनके कष्ट दूर हो जाते हैं। व्रत के दिन साहूकार की बहू की कथा सुनी जाती है।
अहोई अष्टमी का पर्व संतान सुख के लिहाज से अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन माताएं प्राय: निर्जला व्रत रखती हैं।अहोई माता की पूजा और रात में चंद्रमा अथवा तारों को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत पूर्ण होता है।
अहोई अष्टमी व्रत को अहोई आठें भी कहा जाता है। यह करवा चौथ के 4 दिन बाद और दिवाली से 8 दिन पहले पड़ता है।
अष्टमी तिथि प्रारंभ होगी 1 नवम्बर को दोपहर 2:51 बजे
अष्टमी तिथि का समापन: 2 नवम्बर को 1:10 बजे
अहोई अष्टमी मनाई जाएगी— 1 नवंबर, रविवार
पूजा मुहूर्त— शाम 5:35 बजे से शाम 6:53 बजे तक
अहोई अष्टमी के दिन तारा दर्शन का शुभ समय: शाम 6:00 बजे
चन्द्रोदय: रात 11:40 बजे