
अहाई अष्टमी व्रत image AI
Ahoi ashtami : कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि का संतान सुख के लिहाज से बड़ा महत्व है। इस दिन माताएं, अपनी संतान के स्वास्थ्य सुख और खुशहाल जीवन की कामना से व्रत करती हैं। इसे अहोई अष्टमी व्रत कहा जाता है। दिनभर निर्जला रहकर माताएं अहोई माता की पूजा करती हैं और चंद्रमा अथवा तारों को अर्घ्य देकर पारण करती हैं। कहा जाता है कि अहोई अष्टमी के व्रत के प्रभाव से संतान के सभी संकट टल सकते हैं। कार्तिक कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि इस बार दो दिन 1 और 2 नवंबर को पड़ रही है। ऐसे में अहोई अष्टमी व्रत किस दिन रखें, इसपर भ्रम है। धर्माचार्यों और ज्योतिषाचार्यों ने शास्त्रोक्त विधि से इसका हल सुझाया है। उनके अनुसार 1 नवंबर को ही अहोई अष्टमी व्रत रखा जाना उचित होगा।
ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई बताते हैं कि अहोई अष्टमी व्रत का अदभुत प्रभाव होता है। मान्यता है कि व्रत करनेवाली महिला के पुत्र पुत्री और उनके परिवार में सुख-शांति हमेशा बनी रहती है। उन्हें धन संपत्ति प्राप्त होती है, समृद्धिवान बनते हैं। जो महिला इस व्रत को विधि विधान से रखती हैं उनकी संतान हमेशा सुखी बनी रहती है। सबसे खास बात यह है कि उनकी संतान पर कभी भी कोई बड़ा संकट नहीं आता। माता अहोई उनपर आसन्न संकट टल देती हैं।
अहोई अष्टमी पर न केवल निर्जला व्रत रखने का विधान है बल्कि इस दिन कुछ अन्य नियमों के पालन करने की भी बात कही गई है। इस दिन महिलाओं को धारदार चीजों, मिट्टी से संबंधित कार्यों आदि की मनाही की गई है। अहोई अष्टमी पर काले वस्त्र धारण करने की भी रोक रहती है।
ज्योतिषाचार्य पंडित नरेंद्र नागर बताते हैं कि अहोई अष्टमी व्रत के दिन व्रत रखनेवाली महिलाओं को चाकू का उपयोग करने से बचना चाहिए। कैंची का भी इस्तेमाल न करें। महिला व्रत रख रहीं हैं तो किसी भी हाल में संतान को दुखी न करें, उनसे कठोर या अपशब्द न बोलें।
अहोई अष्टमी पर महिलाओं के लिए मिट्टी से संबंधित कार्य करने की रोक रहती है। व्रत रखनेवाली माताओं को रात में पारण तक हर हाल में जागना चाहिए। चंद्रमा या तारों को तांबे के पात्र से अर्घ्य नहीं देना चाहिए। अहोई अष्टमी पर माता अहोई की पूजा पूर्ण विधि विधान से करना चाहिए। व्रत करनेवाली महिलाएं सात्विकता का पूरा पालन करें, भोजन भी बहुत पवित्र होना चाहिए।
अहोई अष्टमी व्रत रखनेवाली महिलाओं की संतान को इसके फायदे मिलते हैं। इस व्रत के प्रभाव से संतान दीर्घायु होती हैं और उन्हें अच्छे जीवनसाथी की प्राप्ति भी होती है।
Updated on:
30 Oct 2026, 6:04 PM IST
Published on:
30 Oct 2026, 6:03 PM IST
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