
Ganesh Atharvashirsha : सनातन धर्म में चतुर्थी तिथि भगवान गणेश को समर्पित की गई है। माह के दोनों पक्षों यानि कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की चौथी तिथि को पाक्षिक गणेश चतुर्थी मनाई जाती है। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी 29 अक्टूबर को है। इस दिन करवा चौथ का पर्व मनाया जाता है। सुहागनों के लिए यह एक खास पर्व है। महिलाएं अपने पति के सुख स्वास्थ्य की कामना के साथ दिनभर कठिन व्रत रखती हैं। शाम को चंद्रमा को अर्घ्य देकर ही भोजन करती हैं। चतुर्थी तिथि होने से इस दिन गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ जरूर करना चाहिए। इससे जीवन में आनेवाली सभी बाधाएं दूर होती है और सुख व संपत्ति प्राप्त होती है।
ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई बताते हैं कि गणेशजी को न केवल प्रथम पूज्य कहा गया है बल्कि उन्हें कष्टहर्ता, विघ्नहर्ता के नाम से भी जाना जाता है। गणेशजी की सबसे पहले पूजा इसी वजह से करते हैं ताकि उपासना निर्विघ्न पूरी हो सके। वैदिक ज्योतिष में गणेशजी की पूजा अर्चना मेें गणेश अथर्वशीर्ष पाठ का सबसे ज्यादा महत्व बताया गया है। इससे गणेशजी प्रसन्न होते हैं और उनके आशीर्वाद से आपके जीवन की दिक्कतें दूर हो सकती हैं।
ज्योतिषाचार्य पंडित नरेंद्र नागर के अनुसार करवा चौथ पर दिन में गणेशजी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करनी चाहिए। उनके समक्ष देशी घी का दीपक जलाएं। भगवान गणेश को हल्दी से तिलक लगाएं और दूर्वा अर्पित करें। भोग के रूप में लड्डू या मोदक अर्पित करें। गणेशजी की प्रसन्नता से घर में दुख और कष्टों से मुक्ति मिल जाती है, सुख-समृद्धि आती है। व्यापारियों के लिए गणेशजी की पूजा सर्वाधिक लाभकारी होती है।
यूं तो गणेशजी का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए शास्त्रों में अनेक ज्योतिषिय उपायों का जिक्र किया गया है पर गणेश अथर्वशीर्ष पाठ इसमें सर्वप्रमुख है। नियमित रूप से गणेश अथर्व शीर्ष पाठ करनेवाले भक्त को जीवन में कभी धन की कमी नहीं होती। ज्योतिषाचार्य पंडित दीपक दीक्षित के अनुसार करवा चौथ पर पूरे मनोयोग से गणेशजी की पूजा करें। उन्हें दूर्वा अर्पित कर गणेश अथर्व शीर्ष का पाठ करें। इससे भगवान विनायक के आशीर्वाद से हर दुख-कष्ट- समस्या से मुक्ति मिल सकती है।