Vidur Niti: कहते हैं कि व्यक्ति के कर्मों, आदतों और उसके व्यक्तित्व का उसके सुख-दुख से बड़ा नाता होता है। वहीं महात्मा विदुर के अनुसार व्यक्ति में पाए जाने वाले ये दोष उसके दुखों का कारण बन सकते हैं और ऐसे व्यक्ति कभी खुश नहीं रह पाते।
महात्मा विदुर की नीतियां व्यक्ति को उसके अवगुणों की पहचान करके जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती हैं। मनुष्य की जिज्ञासा, उसका व्यक्तित्व और कर्म के बदौलत ही इंसान सुख-दुख का अनुभव करता है। अपने नीति शास्त्र में महात्मा विदुर ने कुछ ऐसे दोषों के बारे में बताया है जो अगर किसी इंसान के भीतर हैं तो व्यक्ति सभी सुख-सुविधाएं होने के बावजूद भी सुखी नहीं रह पाता। तो आइए जानते हैं महात्मा विदुर के अनुसार व्यक्ति को किन दोषों से दूर रहना चाहिए...
असंतोष
महात्मा विदुर के अनुसार असंतोष की भावना से ग्रस्त व्यक्ति किसी भी काम या परिस्थिति से खुश नहीं हो पाता। ऐसे लोग जीवन में सभी सुख प्राप्त होने के बावजूद भी संतुष्ट नहीं होते और अपने साथ-साथ परिवार वालों के दुखों का कारण बनते हैं।
क्रोध करना
विदेश नीति के अनुसार क्रोध मनुष्य का सबसे बड़ा दुश्मन माना गया है जो उसे भीतर से खोखला कर देता है। क्रोध में व्यक्ति सही गलत की पहचान नहीं कर पाता और बाद में उसे पछताना पड़ सकता है।
ईर्ष्या की भावना
ईर्ष्या की भावना भी मनुष्य में एक बड़ा दोष माना जाता है। ईर्ष्यालु प्रवृत्ति के लोग ना कभी खुद खुश रहते हैं और ना ही किसी और की उन्नति देखकर उन्हें खुशी मिलती है।
दूसरों पर आश्रित लोग
महात्मा विदुर कहते हैं कि जो लोग हर काम के लिए दूसरों पर निर्भर रहते हैं उन्हें कभी जीवन में सफलता प्राप्त नहीं हो पाती। पराश्रित व्यक्ति कभी भी जीवन में खुद की पहचान नहीं बना पाता।
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