जिले के तराई में कुपोषण से जंग लड़ रहे दर्जनों गांव के मासूम, जिले के जवा ब्लाक के पश्चिमी छोर के दर्जनभर गांवों में कुपोषण से तिल-तिल कर मर रहे बच्चे
रीवा. जिले के दर्जनों गांव में मासूम बच्चे कुपोषण की जंग लड़ रहे हैं। शुक्रवार दोपहर जवा सीएचसी पोषण पुनर्वास केन्द्र (एनआरसी) में भर्ती कराने पहुंची गरीब आदिवासी महिला को चिकित्सकों ने भगा दिया। आला अफसरों की अनदेखी के चलते जिले में सरकार का दस्तक अभियान गरीब आदिवासी परिवार के बच्चों के लिए बेमानी है। उधर, स्वास्थ्य विभाग के आला अफसर कागजी आंकड़े पर सरकार की वाहवाही लूट रहे हैं। जिले के आला अफसर भले ही कुपोषण के लिए दस्तक अभियान चलाने में पसीना बहा रहे हों, कागजी आंकड़े में सरकार की वाह-वाही लूट रहे हों, लेकिन पोषण पुनर्वास केन्द्र की जमीनी हकीकत कुछ और ही है।
जवा के एनआरसी केन्द्र पर चिकित्सकों की मनमानी
शुक्रवार दोपहर 2.30 बजे ग्राम पंचायत कोट के खैरहन बस्ती की सियावती पांच साल के बेटे ज्ञान प्रकाश लेकर जवा एनआरसी पहुंचीं। एनआरसी में मौजूद चिकित्सक ने जांच की। मां सियावती के अनुसार डॉक्टर ने ९ माह के ज्ञान प्रकाश का वजन कराया। वजन 5 किलो 680 ग्राम रहा। भुजा की नाप की तो 12.5 सेमी मिला। बच्चे का सामान्य वजन 6 किलो 500 ग्राम होना चाहिए और भुजा 11.5 से कम होना चाहिए। जांच के बाद चिकित्सक ने कुपोषण होना बताया। लेकिन सियावती को यह कहकर वापस कर दिया कि एनआरसी में जगह नहीं है।
एनआरसी केन्द्र पर चिकित्सक ने कहा 15 दिन बाद आओ
पंद्रह दिन बाद आओ, मां बच्चे को भर्ती करने के लिए गिड़गिड़ाती रही, लेकिन, डॉक्टर ने एक नहीं सुनी। बच्चे की मां ने डॉक्टर से तीसरी बार भर्ती करने के लिए मिन्नत की तो डॉक्टर ने भगा दिया। साथ में समाज चेतना अधिकार मंच के कार्यकर्ता भी मौजूद रहे। इसी तरह डभौरा क्षेत्र के वीरपुर गांव के डेढ़ माह का पवन कुपोषण की जंग लड़ रहा है। डेढ़ साल के पवन का वजन मात्र ढाई किलो है, उसके पूरे शरीर की हड्डी पसली बाहर झलकने लगी है। सामाजिक कार्यकर्ता एवं अधिकार मंच के रामनरेश यादव ने बताया कि यह स्थिति अकेले पवन की नहीं, बल्कि दर्जनभर से अधिक गांव की है। उधर, दस्तक अभियान के दौरान जवा ब्लाक के पश्चिमी छोर के दर्जनभर गांव में मासूम बच्चे कुपोषण की जंग लड़ रहे हैं।
दर्जनभर गांवों में कुपोषण से जंग लड़ रहे 40 मासूम
जवा ब्लाक के डभौरा क्षेत्र के जेतरी ग्राम पंचायत के लफदां, ननेकी, लोनी-521 के पोगला सहित गुद, जरहवा, गर्भे सहित अन्य कई गांवों में 35-40 बच्चे कुपोषित हैं। इसके अलावा करीब 87 बच्चों मध्य कुपोषित हैं। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने वजन कर चिहि़ंत किया है। लेकिन, चिह्ंित बच्चों को न तो पोषण आहार दिया जा रहा है और न ही उन्हें एनआरसी या फिर अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
एनआरसी में 140 बच्चों का भर्ती करने का दावा
जिले के स्वास्थ्य अधिकारी का दावा है कि जिला मुख्यालय से लेकर ग्रामीण क्षेत्र की एनआरसी में 140 बच्चों को भर्ती कराया गया है। दस्तक अभियान के दौरान प्रदेशभर में सबसे अधिक बच्चों को भर्ती कर इलाज किए जाने में अव्वल स्थान प्राप्त हुआ है। जिला मुख्यालय को मिलाकर जिले में कुल 9 एनआरसी केन्द्र बनाए गए हैं।
वर्जन...
दस्तक अभियान के दौरान कुपोषित बच्चों को एनआरसी में जगह नहीं मिलने पर वार्ड में भर्ती करने का निर्देश दिया गया है। अगर ऐसा है तो जांच कराएंगे। दस्तक अभियान के तहत सबसे ज्यादा बच्चे रीवा में भर्ती कराए गए हैं।
आरएस पांडेय, सीएमएचओ