रीवा

प्रदेश के इस विश्वविद्यालय में अतिथि विद्वानों को मिल सकता है अच्छा मानदेय, आप भी आजमाएं किस्मत

मांगों पर अधिकारियों का सकारात्मक रवैया...

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Jul 17, 2018
Executive council Rewa APSU will increase in pay of guest faculty

रीवा। अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय में अतिथि विद्वानों के मानदेय में बढ़ोत्तरी का निर्णय प्रवेश प्रक्रिया समाप्त होने तक के लिए अधर में लटक गया है। राहतभरी खबर यह है कि निर्णय विश्वविद्यालय समन्वय समिति में जाते-जाते बचा। विश्वविद्यालय में बुलाई कार्यपरिषद की बैठक में पहले सभी पाठ्यक्रमों से होने वाली आय का लेखा-जोखा तैयार करने का निर्णय लिया गया। मानदेय में बढ़ोत्तरी का निर्णय अगली बैठक तक के लिए टल गया है।

तीन घंटे तक चली सदस्यों की बैठक
अतिथि विद्वानों के आंदोलन और उन्हें दिए गए आश्वासन के मुताबिक, सोमवार को विश्वविद्यालय में कार्यपरिषद की बैठक हुई। दोपहर करीब साढ़े तीन बजे शुरू हुई बैठक शाम के साढ़े छह बजे तक चली। तीन घंटे चली बैठ में लंबी चर्चा के बाद सदस्यों ने यह निर्णय लिया कि पाठ्यक्रमों में छात्रों की संख्या संतोषजनक रहती है और उनकी फीस से इतनी आय प्राप्त होती है कि अतिथि विद्वानों को बढ़ा मानदेय दिया जा सकता है तो कार्यपरिषद की अगली बैठक बुलाकर बढ़ोत्तरी का निर्णय ले लिया जाएगा।

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....तो तत्काल हो जाएगी बढ़ोत्तरी
सदस्यों के बीच इस बात पर भी सहमति बनी कि यदि इस बीच कोई दूसरा विश्वविद्यालय उच्च शिक्षा विभाग की ओर से जारी निर्देशों के तहत मानदेय में बढ़ोत्तरी कर देता है तो यहां भी बढ़ोत्तरी का आदेश तत्काल लागू कर दिया जाएगा। सदस्यों ने कहा कि जिन पाठ्यक्रमों से उतनी आय भी नहीं प्राप्त हो रही है कि उससे अतिथि विद्वानों को मानदेय दिया जा सके, उन पाठ्यक्रमों को बंद कर दिया जाना चाहिए। बैठक में कुलपति प्रो. केएन सिंह यादव, कुलसचिव लाल साहब सिंह के अलावा डॉ. एसएस तिवारी, प्रो. जेपी सिंह, प्रो. अतुल पाण्डेय, जेएस महोबिया व डॉ. अरुण त्रिपाठी सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।

सदस्यों के समक्ष अतिथि विद्वानों ने रखा पक्ष
कार्यपरिषद की बैठक में नियम से इतर अतिथि विद्वानों को उनका पक्ष रखने का मौका दिया गया है। परिषद सदस्य डॉ. एसएस तिवारी ने बैठक में अतिथि विद्वानों को पक्ष रखने का मौका दिलाया। बैठक के दौरान डॉ. विजय मिश्रा व डॉ. एसपी सिंह ने उच्च शिक्षा विभाग के आदेश का हवाला देते हुए अपना तर्क रखा। माना जा रहा है कि अतिथि विद्वानों की ओर से पक्ष रखे जाने का ही नतीजा रहा है कि निर्णय विश्वविद्यालय समन्वय समिति के पाले में जाते-जाते रह गया।

निर्णय से संतुष्ट नहीं हुए अतिथि विद्वान
कार्यपरिषद की बैठक के दौरान प्रशासनिक भवन में सैकड़ों की संख्या में डेरा जमाए अतिथि विद्वान परिषद में हुए निर्णय से संतुष्ट नहीं हुए। अतिथि विद्वानों ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन जानबूझकर मानदेय में बढ़ोत्तरी को लंबित कर रहा है। मानदेय बढ़ोत्तरी के मद्देनजर पाठ्यक्रमों से पर्याप्त आय होती है। इसके लिए प्रवेश प्रक्रिया पूरी होने तक इंतजार करने का निर्णय मामले को महज लंबित करने की दृष्टि से लिया गया है।

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