
रीवा. रोग व कीट से बची किसानों की धान की फसल अब मौसम की बेरहमी की भेंट चढ़ रही है। सूरज के तेज के आगे फसल की सिंचाई करके भी किसानों के लिए फसल को बचा पाना मुमकिन नहीं हो पा रहा है। पिछले तीन में आसमान में बादलों की चल रही लुकाछिपी की भी फसल को राहत देने में नाकाफी है।
कुछ इलाकों को छोड़ बिना बरसे निकल जा रहे बादल
पिछले तीन दिन से हर रोज आसमान में बादल दिखाई तो देते हैं, लेकिन कुछ एक इलाकों को छोडक़र बिना बरसे निकल जा रहे हैं। शनिवार को भी दोपहर बाद कुछ ऐसा ही नजारा दिखा। आसमान में बादल छाए तो जरूर, लेकिन उम्मीदों पर पानी फेरते हुए बिना बरसे आगे बढ़ गए। नतीजा जहां किसान निराश हुए। वहीं सूरज की तपन झेल रहे फसलों को भी राहत नहीं मिली।
सिंचाई का फसल पर पड़ रहा प्रतिकूल असर
मौसम में तल्ख तेवर के बीच धान की फसल पर सिंचाई का प्रतिकूल असर पड़ रहा है। अधिकतम तापमान 37 डिग्री सेंटीग्रेड होने के चलते दोपहर में खेत का पानी खौलने जैसी स्थिति में पहुंच जाता है। कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक इस स्थिति में धान की उत्पादकता बुरी तरह से प्रभावित होगी। प्रतिकूल मौसम के बीच फसल का सुरक्षित रह पाना संभव नहीं है।
दांव पर लग गई है हजारों हेक्टयर धान
सूरज की तल्खी के चलते किसानों की हजारों हेक्टेयर धान की फसल दांव पर लग गई है। दरअसल अब की बार धान 110 हजार हेक्टेयर की अधिक रकबे में धान की बोवनी हुई है। इनमें आधी से अधिक बोवनी देर से हुई है। नतीजा फसल तैयार होने में अभी वक्त है। ऐसे में बढ़ा तापमान उन फसलों को अधिक नुकसान हो रहा है, जिनकी बोवनी देर से हो रही है।