दी आंदोलन की चेतावनी...
रीवा। शासन स्तर से अध्यापकों के शिक्षा विभाग में संविलियन के लिए जारी राजपत्र में कई सारी विसंगतियां हैं। विसंगति को लेकर न केवल अध्यापकों में रोष है। बल्कि उनकी ओर से आंदोलन का निर्णय भी लिया गया है।
बैठक के दौरान अध्यापकों के बीच हुई चर्चा
आजाद अध्यापक संघ के बैनर तले शहर के एक स्थानीय विवाहघर में आयोजित बैठक में अध्यापकों के बीच राजपत्र की विसंगतियों पर चर्चा हुई। अध्यापकों ने चर्चा के दौरान रोष जाहिर करते हुए कहा है कि सरकार ने एक ओर जहां संविलियन का विसंगतिपूर्ण आदेश जारी किया है। वहीं दूसरी ओर अध्यापकों से इस बात का वचन पत्र भराया जा रहा है कि वह नियुक्ति बाद किसी भी तरह की आपत्ति नहीं करेंगे।
मांग पूरी नहीं हुई तो करेंगे उग्र आंदोलन
संघ के जिलाध्यक्ष अनिल शुक्ला की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में अध्यापकों ने आदेश में विसंगति को दूर करने की मांग की। साथ ही कहा कि जल्द ही सरकार इस ओर कोई ठोस कदम नहीं उठाती है तो वह उग्र आंदोलन करने को बाध्य होंगे। जल्द ही आंदोलन के तिथि की घोषणा की जाएगी।
चर्चा के दौरान यह अध्यापक रहे उपस्थित
बैठक में दीपक मिश्रा, धानेंद्र सिंह, कुंजबिहारी तिवारी, रवि दुबे, गुरु शुक्ला, सुभाष चतुर्वेदी, पुष्पराज पांडे, अजीत पांडे, दिलीप तिवारी, आसिफ कुरैशी, सुभाष पांडे, ज्ञानेंद्र उपाध्याय, कृष्ण कुमार पांडे, शैलेंद्र सिंह यादव, विद्याधर द्विवेदी, सुरेश पटेल, राजीव तिवारी, अनिल पांडे, दुर्गेश वर्मा, आशुतोष तिवारी, अनिल तिवारी, राजेश मिश्रा, रजनीश शुक्ल, अनिल शुक्ल, मुन्नी बाई साकेत, अनीता सोंधिया सहित अन्य अध्यापक उपस्थित रहे।
पूर्व प्रधानमंत्री को दी गई श्रद्धांजलि
अध्यापक संघ की बैठक में सबसे पहले पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी के निधन पर अध्यापकों ने शोक व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी। श्रद्धांजलि सभा में आध्यापकों की ओर से पूर्व प्रधानमंत्री के कार्यों और व्यक्तित्व पर चर्चा की गई। अध्यापकों ने कहा कि जनप्रतिनिधियों को उनसे सीख लेने की जरूरत है।
राजपत्र में प्रमुख विसंगतियां
- वरिष्ठता से संबंधित बिन्दु पर राजपत्र में कोई जिक्र नहीं
- शिक्षा विभाग में नियुक्ति एक जुलाई 2018 से होगी मान्य
- संविलियन के पहले व बाद में सातवें वेतनमान की चर्चा नहीं
- निर्धारित सेवा शर्तों को जबरन मान्य कराने भरा रहे वचन पत्र