शहर के खैरा पुरानी बस्ती में रास्ते का विवाद, कलेक्टर के निर्देश की तहसीलदार ने की अनदेखी
रीवा. जिला प्रशासन भले ही फरियादियों को लेकर संवेदना दिखा रहा हो। लेकिन, मातहत पीडि़तों को न्याय दिलाने के बजाए भीड़ को भडक़ाने जैसा तंज कस रहे हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि जिस अधिकारी को शांति व्यवस्था बनाए रखने जिम्मेदारी दी गई है, वह पीडि़तों से व्यंगात्मक बात कर रहा है। सोमवार दोपहर डेढ़ बजे कलेक्ट्रेट गेट पर कुछ ऐसा ही हुआ।
तहसीलदार की बातचीत सुन लोग रह गए दंग
वार्ड-४ की खैरा पुरानी बस्ती की पीडि़त महिलाओं से हुजूर तहसीलदार की बातचीत सुन कर वहां मौजूद हर कोई दंग रह गया। इतना ही नहीं तहसीलदार साहब उस वक्त और तमतमा गए जब उनकी यह सब करतूत मोबाइल वीडियो में कैद हो रही थी।
महिलाएं बच्चों को लेकर पहुंचीं कलेक्ट्रेट
शहर के वार्ड-4 के खैरा पुरानी बस्ती के रहवासियों का रास्ता बंद हो गया। मोहल्ले की दर्जनभर परिवार की महिलाएं बच्चों को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचीं। कलेक्टर प्रीति मैथिल टीएल सहित अन्य योजनाओं को लेकर एक बजे तक मीटिंग में व्यस्त रहीं। करीब डेढ़ बजे कलेक्टर महिलाओं से मिलीं। समस्याएं सुनी और तहसीलदार को बुलाकर बस्ती में रास्ता की समस्या दूर कराने का निर्देश दिए।
कलेक्टर के जाने के बाद तहसीलदार के बदले सुर
कलेक्टर के जाने के बाद हुजूर तहसीलदार पीडि़त महिलाओं से बात करते हुए कलेक्ट्रेट भवन के मुख्य गेट पर पहुंच गए। इस दौरान महिलाओं ने कहा साबह रास्ता जल्दी चालू करा दीजिए। विरोध करने पर लाठी-डंडा लेकर मारने के लिए दौड़ते हैं। तहसीलदार ने महिलाओं से कहा जाओ एक सप्ताह में रास्ते की समस्या हल हो जाएगी। यह कहते हुए तहसीलदार अगे बढ़ गए।
तहसीलदार के व्यंग सुन सहम गई महिलाएं
गेट की सीढिय़ां उतरने के बाद महिलाओं ने तहसीलदार से दोबारा मिन्नत करते हुए कहा कि रास्ता बंद करने के विरोध करने पर लाठी-डंडा लेकर मारने के लिए खड़े हो जाते हैं। इस पर तहसीलदार ने पीडि़त महिलाओं से कहा तुमलोग भी लाठी-डंडा चलाओ। तहसीलदार के इस तरह के व्यंग से महिलाएं सहम गईं। आस-पास खड़े लोग भी दंग रह गए।
तहसीलदार लाठी-डंडा चलाने दे रहे संदेश
पीडि़त महिला सुनीता, प्रीति, रामविशाल, शिवकुमार सहित अन्य ने बताया कि रास्ता बंद होने से सैकड़ों परिवार के लोग प्रभावित हैं। कलेक्टर के निर्देश के बाद भी तहसीलदार रास्ता खुलवाने के बजाए उल्टा लाठी-डंडा चलाने की बात कर रहे हैं। तहसीलदार के व्यंग से महिलाओं में असंतोष है। महिलाओं ने कहा कि जब अधिकारी ऐसे बात करेंगे तो हम लोग कहां जाएं।