
रीवा. अगर आप डायबिटीज के मरीज हैं तो आपको सतर्क रहने की जरूरत है। इस बीमारी के चलते किडनी फेल्योर और अंधेपन की समस्या बढ़ गई है। श्यामशाह मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग में हुए अध्ययन में यह खुलासा किया गया है। मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. पीके बघेल और डॉ. केशव सिंह के मार्गदर्शन में यह अध्ययन डॉ. उमेश प्रताप सिंह ने संजय गांधी अस्पताल में किया है।
विंध्य क्षेत्र के ग्रामीण क्षेत्रों से आए 500 मधुमेह रोगियों पर हुए अध्ययन में 8 6 (17.2 प्रतिशत) रोगियों में आंखों की खराबी रेटिनोपैथी और 117 (23.04 प्रतिशत) रोगियों में गुर्दे की खराबी पायी गई। अध्ययन में सर्वाधिक रोगी 40 से 60 वर्ष के बीच के शामिल रहे। अध्ययन में पाया गया कि जिन मधुमेह रोगियों में डायबिटीज का ड्यूरेशन 104 से अधिक था उनमें रेटिनोपैथी की समस्या अधिक थी। जिन रोगियों में खाली पेट ब्लड शुगर लेवल 140 से कम था उनमें गुर्दे की खराबी 15.38 प्रतिशत था और जिनमें यह लेवल 140 से अधिक था उनमें गुर्दे की खराबी 27.03 प्रतिशत थी। वहीं जिन रोगियों में मोटापा या फिर ब्लड में वसा का स्तर अधिक था वह रेटिनोपैथी और गुर्दे दोनों की समस्या पायी गई।
ये निकाला निष्कर्ष
अध्ययन से यह निष्कर्ष निकाला गया है कि गांवों में मधुमेह की जांच न होने से रोगियों को इस बीमारी से होने वाले दुष्परिणामों के बारे में पता नही होता है। इसलिए वे शहरी क्षेत्र में रहने वालों की अपेक्षा ज्यादा प्रभावित हैं। इसलिए ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक से अधिक डायबिटीज कैंप लगाए जाएं, ताकि लोगों को इस बीमारी के दुष्परिणामों से बचाया जा सके।
हर साल आ रहे दो हजार नए रोगी
मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. मनोज इंदुलकर का कहना है कि विंध्य रीजन में मधुमेह रोग तेजी से बढ़ रहा है। सालभर में 20 हजार रोगी विभाग में उपचार के लिए भर्ती हो रहे हैं जिसमें 2 हजार रोगी केवल मधुमेह से पीडि़त होते हैं। गौर करने वाली बात ये है कि डायबिटिक फुट अल्सर के रोगियों की संख्या भी बढ़ी है। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि स्थिति नियंत्रण मेंं नही है।
अध्ययन में लगे 18 माह
मधुमेह के चलते होने वाले दुष्परिणामों के बारे में पता करने के लिए डॉ. उमेश प्रताप सिंह को 18 माह का वक्त लगा। मार्च 2016 से अध्ययन शुरू किया था जो अगस्त 2017 में पूरा हुआ। शोध मेडिसिन जनरल में अगले महीने प्रकाशित होगा।