सिवनी से लाए गए बाघ की हालत में सुधार, खतरे से बाहर अब भी नहीं- मुकुंदपुर में चल रहा इलाज, काफी कमजोर हालत में लाया गया था
रीवा। महाराजा मार्तण्ड सिंह जूदेव मुकुंदपुर में सिवनी से लाए गए बाघ की हालत में अब कुछ सुधार बताया गया है। चिकित्सकों का कहना है कि यह अब भी खतरे से बाहर नहीं है। पूरे दिन उसकी सेहत पर नजर रखी जा रही है। करीब दो सप्ताह पहले सिवनी में दो किसानों के ऊपर बाघ ने हमला किया था लेकिन उस दौरान भी यह इतना कमजोर था कि यह अधिक नुकसान नहीं पहुंचा पाया था। पकड़े जाने के बाद वन विभाग ने मुकुंदपुर के रेस्क्यू सेंटर में इसे भेजा गया है।
बताया गया है कि यह इतना कमजोर हो चुका था कि भोजन भी स्वयं नहीं कर पाता था, रेस्क्यू सेंटर में उसे दवाएं दी जा रही हैं, अब खाना खुद खाने लगा है और खड़े होने का भी प्रयास करने लगा है। चिकित्सकों का कहना है कि इसके लीवर में इंफेक्शन की समस्या है, उसमें धीरे-धीरे सुधार होगा। पेंच टाइगर रिजर्व का यह बाघ है जिसे कई दिनों तक पानी और खाने को कुछ नहीं मिलने के चलते यह समस्या बताई जा रही है। इसकी सेहत को लेकर सीसीएफ से लेकर भोपाल के अधिकारियों तक की नजर है। अभी यह तय नहीं हुआ है कि ठीक होने के बाद यह मुकुंदपुर में ही रहेगा या फिर दूसरी जगह छोड़ा जाएगा। संभावना जताई जा रही है कि यदि ठीक हुआ तो मुकुंदपुर चिडिय़ाघर में ही रखने का दावा किया जाएगा।
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चिडिय़ाघर में पर्यटकों के लिए आधुनिक वाटर प्वाइंट बनाया गया
रीवा। महाराजा मार्तण्ड सिंह जूदेव चिडिय़ाघर मुकुंदपुर में आने वाले पर्यटकों को शीतल पानी उपलब्ध कराने के लिए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की ओर से वाटर प्वाइंट दिया गया है। बैंक के भोपाल वृत्त के मुख्य महाप्रबंधक राजेश कुमार ने इसका लोकार्पण कर पर्यटकों के लिए प्रारंभ किया। बताया गया है कि इसकी लागत करीब सात लाख रुपए की है। यहां पर शुद्ध एवं ठंडा पानी पर्यटकों को मिलेगा। इस लोकार्पण के अवसर पर बैंक के कई अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे। चिडिय़ाघर के संचालक संजय रायखेड़े ने बताया कि इस वाटर प्वाइंट से पर्यटकों को काफी सुविधा मिलेगी। परिसर के जिस हिस्से में ठंडे पानी की व्यवस्था नहीं थी, वहां भी अब उपलब्ध हो गई है।