मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया के प्रतिनिधि ने पूरे दिन की आवश्यक संसाधनों की पड़ताल
रीवा। श्यामशाह मेडिकल कॉलेज में इएनटी विभाग में एमएस का कोर्स प्रारंभ करने की उम्मीदें जागृत होने लगी हैं। बीते 12 वर्ष से यहां पर पीजी का यह कोर्स बंद है। इसके पहले कई प्रयास किए गए लेकिन कॉलेज प्रशासन को सफलता नहीं मिली। अब एक बार फिर मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया के प्रतिनिधि ने निरीक्षण किया और एमएस कोर्स के आवश्यक संसाधनों की पड़ताल की। मेडिकल काउंसिल की जो शर्तें हैं, उन सभी को पूरा किए जाने का इस बार कॉलेज प्रशासन ने दावा किया है। जिसके चलते कोर्स संचालित करने की अनुमति मिलने की संभावना बढ़ी है।
पीजी की चार सीटें प्रारंभ करने के लिए मेडिकल कॉलेज रीवा ने आवेदन किया था, उसी के सिलसिले में निरीक्षण के लिए एमसीआई ने कर्नाटक के मांड्या इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल कॉलेज के इएनटी के विभागाध्यक्ष डॉ. हनुमंथा प्रसाद एम को रीवा भेजा। उन्होंने मेडिकल कॉलेज रीवा के इएनटी के विभागाध्यक्ष डॉ. सुरेन्द्र सिंह मौपाची के साथ आउटडोर, ऑपरेशन थियेटर, क्लीनिकल एवं इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी सभी आवश्यकताओं का परीक्षण किया। बताया गया है कि इस निरीक्षण से जुड़ी रिपोर्ट मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया में पेश की जाएगी। सितंबर के आखिरी या फिर अक्टूबर के पहले सप्ताह में एमसीआई के बोर्ड की बैठक में इस पर निर्णय लिया जाएगा।
2007 से रीवा में बंद है कोर्स
वर्ष 2007 से मेडिकल कॉलेज द्वारा एमएस की डिग्री में प्रवेश नहीं दिया जा रहा है। इस पर मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया ने रोक लगा रखी है। वर्तमान में यहां पर पीजी के छात्र नहीं होने से मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवा पर भी असर पड़ रहा है। इएनटी का एमएस कोर्स प्रारंभ करने के लिए इसके पहले वर्ष २०१३ एवं २०१४ में प्रयास किए गए थे। मेडिकल कॉलेज की ओर से आवेदन तो किए गए थे लेकिन जो आवश्यक संसाधन चाहिए वह नहीं होने के चलते मान्यता नहीं मिली थी। पूर्व की कमियों को सुधारने के बाद इस बार आवेदन किया गया था।
कोर्स को बिना मान्यता चलाने पर लगी थी रोक
श्यामशाह मेडिकल कॉलेज रीवा में 1980 में एमएस की एक सीट और चार डिप्लोमा सीटों पर प्रवेश शुरू किया था। लगातार कई वर्षों तक यहां कोर्स संचालित होते रहे। मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया की ओर से इनकी मान्यता लेने का प्रयास नहीं किया गया। जिसकी वजह से यहां से उत्तीर्ण होने वाले छात्रों को दूसरी जगह नौकरी में परेशानी होने लगी। इसी वजह से पास आउट हुए एमएस के 11 और डिप्लोमा के 35 छात्रों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर रहा कि उन्होंने पढ़ाई पूरी की है, मान्यता मेडिकल कॉलेज प्रशासन की लापरवाही के चलते नहीं मिली है। इसलिए उन पर इसका असर पड़ रहा है। लंबे समय तक सुनवाई के बाद कोर्ट ने उक्त छात्रों को पास होने के बाद मान्यता दिलवाई और वर्ष 2007 में हुए प्रवेश के बाद से मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया से अनुमति मिलने तक कोर्स में प्रवेश बंद रखने का निर्देश दिया।
प्रक्रिया शुरू करने के लिए आवेदन किया
डॉ. एसएस मौपाची, विभागाध्यक्ष इएनटी मेडिकल कालेज रीवा ने इस संबंध में बताया कि एमएस की चार सीटों पर प्रवेश की प्रक्रिया शुरू करने के लिए आवेदन किया गया था। जिस पर एमसीआई के प्रतिनिधि ने निरीक्षण किया है। हमारी तैयारियां पूरी हैं, इसलिए उम्मीद है कि अनुमति जल्द मिलेगी।