शासन स्तर के अधिकारियों ने बदली व्यवस्था...
रीवा। खरीफ में फसल बोवनी की तैयारी को लेकर समीक्षा के लिए अब स्थानीय अधिकारियों को शहडोल तक की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। शासन स्तर के अधिकारियों ने समीक्षा बैठक को लेकर कुछ ऐसा ही फेरबदल किया है। इससे एक ओर जहां फिजूलखर्ची से राहत मिलेगी। वहीं दूसरी ओर अधिकारियों का समय भी बचेगा।
29 जून को शहडोल में होनी थी बैठक
शहडोल में 29 जून को होने वाली समीक्षा बैठक के मद्देनजर कृषि उत्पादन आयुक्त ने स्थानीय अधिकारियों के लिए निर्देश जारी किया है कि अब समीक्षा वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए होगी। उत्पादन आयुक्त ने स्थानीय अधिकारियों को इसकी जानकारी मोबाइल पर मैसेज के जरिए दी है। सूत्रों की माने तो जल्द ही इस बावत आदेश भी जारी कर दिया जाएगा। शासन स्तर से फिजूलखर्ची को रोकने के लिए वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए फसल बोवनी के तैयारी की समीक्षा करने का निर्णय लिया गया है।
बैठक में शामिल होते सात जिलों के अधिकारी
पूर्व की योजना के तहत शहडोल में 29 जून को दो संभागों के सात जिलों की समीक्षा की जानी थी। बैठक में शासन स्तर से कृषि उत्पादन आयुक्त, विभाग के अपर मुख्य सचिव व संचालक सहित अन्य अधिकारियों के साथ सहकारिता, उद्यानिकी, पशुपालन व मत्स्य पालन विभाग के भी अधिकारी शामिल होते। सात जिलों के स्थानीय अधिकारियों को भी वहां पहुंचना पड़ता। जिसमें लाखों रुपए फिजूल में खर्च हो जाते। लेकिन अब इस फिजूलखर्ची से राहत मिलेगी। क्योंकि सभी अधिकारी अपने जिलों में रहकर वीडियों कांफ्रेंसिंग से बात करेंगे।
चंदा लगाकर होता रहा है लाखों खर्च
पूर्व में समीक्षा बैठक में लाखों रुपए का वेबजह फिजूल में खर्च होता रहा है। वह भी बिना मद के। विभाग के पास बैठक के मद में कोई बजट नहीं होता है। नतीजा अधिकारियों को खर्च के लिए चंदा लगाना पड़ता है। चूंकि बैठक में कई विभागों के अधिकारी शामिल होते हैं। इसलिए यह खर्च लाखों में होता है।
बैठक में होती है यह फिजूलखर्ची
- शासन स्तर के अधिकारियों के लिए वाहन की व्यवस्था
- अधिकारियों के लिए चिह्नित जिले में ठहरने की व्यवस्था
- आधा दर्जन विभागों के स्थानीय अधिकारियों के यात्रा का खर्च
- संभाग व जिले स्तर के अधिकारियों के ठहरने की व्यवस्था
- बैठक के दौरान स्वल्पाहार सहित अन्य व्यवस्थाओं का खर्च