रीवा

जानिए, ऐसा क्या कर रहे भाजपा सांसद, करोडों के कर्ज में डूबा प्रधानमंत्री मोदी का सांसद आदर्श गांव

रीवा सांसद ने तीन गांव लिए गोद, तीन साल बाद भी आदर्श गांव में बिजली, पानी जैसी योजनाएं अपूर्ण
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Feb 18, 2018
MP Adarsh village in crores of debt
MP Adarsh village in crores of debt

रीवा. सांसद जर्नादन मिश्र टॉयलेट की सफाई कर भले ही सोशल मीडिया की सुर्खियों बटोरने में लगे होंं। लेकिन जिस ग्राम हरदुआ को उन्होंने गोद ले रखा है वहां के लोगों को तीन साल बाद भी मूलभूत सुविधाएं नसीब नहीं हो सकी हैं सांसद आदर्श गांव के विकास की बात तो दूर है, प्रशासनिक लापरवाही और सांसद की उदासीनता की हद तो यह है कि हरदुआ के अलावा चयनित दो अन्य गांवों का अभी तक डीपीआर तक तैयार नहीं हो पाया है। हैरान करने वाली बात तो यह है कि सांसद आदर्श ग्राम एक करोड़ रुपए से अधिक के कर्ज में डूब गया है। प्रधानमंत्री और इंदिरा आवास योजना सहित अन्य योजनाओं के निर्माण के एक करोड़ रुपए की मजदूरी बकाया है।
11 अक्टूबर 2014 को सांसद आदर्श ग्राम की व्यवस्था हुई थी लागू
प्रधानमंत्री द्वारा गांवों के विकास और उनकी सूरत बदलने के लिए 11 अक्टूबर 2014 को सांसद आदर्श ग्राम की व्यवस्था लागू की गई थी। सांसद जनार्दन मिश्र ने सबसे पहले 2014 में हरदुआ गांव को गोद लिया था। इसके बाद त्योंथर तहसील का बड़ागांव और तीसरा रीवा के अमवा गांव को गोद लिया है। बड़ागांव का डीपीआर तैयार होने को है लेकिन अमवा गांव की जानकारी ही अधिकारियों को नहीं है। डीपीआर तैयार करना दूर की बात है।
आर्दश गांव में नहीं बन पाए आवास
सांसद ने आदर्श गांव बनाने के लिए हरदुआ को गोद तो ले लिया लेकिन कई योजनाएं अधूरी पड़ी हुई हैं। इंदिरा आवास योजना की बात करें तो इस योजना के तहत गांव के 84 गरीबों को चयनित किया है। सरपंच 70 आवास पूर्ण करने का दावा कर रहे हैं। वहीं 32 गरीबों को प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास (पीएमजीएवाई) के आवास बनाए जा रहे। करीब 25 आवास की छत पड़ गई है, शेष आवासों का अभी काम नहीं शुरू हुआ है। सच्चाई यह भी है कि अधिकांश लाभार्थियों को मजदूरी तक नहीं मिली। आवास के हर लाभार्थी को 14 हजार रुपए दिहाड़ी दी जानी है। आदर्श गांव के लाभार्थियों के खाते में दो साल बीतने के बावजूद दिहाड़ी नहीं पहुंची।
एक करोड़ का भुगतान बकाया
पीएमजीएवाई में हर लाभार्थी को 18 हजार रुपए श्रम का दिया जाना है। गांव के रामसखा कोल का आवास बनकर तैयार हो गया, लेकिन दिहाड़ी का भुगतान नहीं हो सका। खेल मैदान, पीसीसी सडक़ सहित अन्य निर्माण योजनाओं को मिलाकर दिहाड़ी और मटेरियल का लगभग एक करोड़ रुपए का भुगतान बकाया है। इसको लेकर सरपंच परेशान हैं। सांसद से फरियाद कर चुका है, लेकिन उन्होंने कार्यों को पूरा कराने और भुगतान में रूचि नहीं दिखाई।
पानी टंकी-खेल मैदान सहित कई योजनाएं अधूरी
सांसद आदर्श गांव हरदुआ में तीन साल बीतने के बाद भी सडक़, बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं ग्रामीणों को मुहैया नहीं हो सकी हैं। बस्ती में कुछ गलियों को छोड़ दे तो कई गरीबों के दवाजे पर पहुंचना मुश्किल होता है। आदिवासी और साकेत बस्ती में पीसीसी मार्ग का निर्माण अधूरा छोड़ दिया गया है। बजट के अभाव में खेल मैदान और शांति धाम का निर्माण भी अपूर्ण हैं। नलजल योजना का पचास फीसदी भी निर्माण पूरा नहीं हो सका है। तमाम कोशिश के बावजूद सांसद आदर्श गांव में गरीबों को सुविधाएं मिलना अभी कोसों दूर हैं।

वर्जन...
हरदुआ गांव का सामाजिक स्तर बदला है। हां ये बात जरूर है कि मनरेगा का फंड नहीं आने से आवासों के श्रम का भुगतान नहीं हो पाया। कई निर्माण कार्यों में सरपंच निजी पंूजी लगा दिया है। अर्थव्यवस्था के कारण कुछ योजनाएं प्रभावित हैं। इसके लिए समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं।
जनार्दन मिश्र, सांसद, रीवा

Updated on:
18 Feb 2018 01:33 pm
Published on:
18 Feb 2018 01:30 pm