शहर के लोगों ने उठाया सुविधाओं का मुद्दा...
रीवा। शहर का विकास तो चाहिए ही मूलभूत सुविधाएं भी साथ ही मिले। मुसीबत भरा अनियोजित विकास नहीं चाहिए। पत्रिका के स्थापना दिवस सेलीब्रेशन के तहत आयोजित टॉक शो में शहर के रहवासियों ने कहा कि काम पब्लिक के लिए होना चाहिए। नेताओं के कमीशन के लिए नहीं। शिवनगर में आयोजित टॉक शो में उठाए गए ये मुद्दे...
गरीबों से छीनकर बेची जा रही जमीन
वैसे तो शहर के रहवासियों को कई मूलभूत सुविधाओं की दरकार है। लेकिन बेहतर होगा कि सबसे पहले गरीबों को उनके कब्जे की जमीन पर पट्टा देने के बजाए छीने जाने की प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए। दलित और मलिन बस्तियों को खाली कराकर बेचा जा रहा है।
वीरेंद्र सिंह, पूर्व पार्षद।
स्थानीय समस्याओं को उठाए पत्रिका
राजस्थान में पत्रिका ने काला कानून पर ताला लगाया है। मध्य प्रदेश में भी विधानसभा में प्रश्न उठाए जाने पर लगाम लगाए जाने की कोशिश को नाकाम किया गया। बेहतर होगा कि स्थानीय स्तर की समस्याओं को भी उठाया जाए। शहरवासी परेशानी हैं।
तरूण सिंह, रहवासी शिवनगर।
नाली से नर्क बन गया जीवन
कहने को तो शहर में बहुत तेजी के साथ विकास हुआ है। लेकिन नाली का बुरा है। बरसात आ रही है। चार महीने शहर के कई गली मुहल्लों में नर्क जैसी स्थिति हो जाती है। पत्रिका इस नरकीय स्थिति से निजात दिलाए। लगातार खबर आए तो टूटे अधिकारियों की नींद।
रामनरेश मिश्रा, रहवासी शिवनगर।
सीवर लाइन बन गई नई समस्या
शहर के लोग कई समस्या से पहले ही जूझ रहे हैं। सीवर लाइन के रूप में एक नई समस्या खड़ी हो गई। शानदार बनी सडक़ों को तोड़ कर पाइपलाइन डाल रहे हैं। लेकिन पाइप डालने के बाद सडक़ों को दुरुस्त नहीं कर रहे हैं। नतीजा गड्ढ़े लोगों के लिए मुसीबत बन रहे हैं।
कामता सिंह, शहर रहवासी।
वार्डवार समस्याओं पर करें गौर
कहीं नाली की तो कहीं पानी। सडक़ व बिजली सहित कई समस्याओं से पूरा शहर जूझ रहा है। वार्डवार समस्याओं पर मुद्दा उठाया जाना चाहिए। पत्रिका की ओर से मुद्दा उठाया गया तो जरूर राहत मिलेगी। पहले भी कई समस्याओं से पत्रिका ने निजात दिलाया है।
राकेश सिंह, शहरवासी।
सुनियोजित विकास होना चाहिए
शहर में विकास तो हो रहा है। लेकिन अनियोजित है। पहले सडक़ बनाते हैं। फिर नाली के लिए तोड़ देते हैं। फिर सडक़ बनाते हैं और उसके बाद सीवर लाइन के लिए तोड़ रहे हैं। इस स्थिति में जनता का पैसा भी बर्बाद हो रहा है और परेशानी भी हो रही है।
दिलराज सिंह, शहर रहवासी।
निर्माण कार्य में नहीं है गुणवत्ता
गली-मोहल्लों में कार्य तो हो रहा है। लेकिन गुणवत्ता निम्न स्तर की है। बेहतर होगा कि जो भी कार्य हो वह गुणवत्तापूर्ण हो। गुणवत्ता की जांच होनी चाहिए। पत्रिका को भी इस गौर फरमाना चाहिए। जहां घटिया निर्माण हो उसे प्रकाशित किया जाए तो ठेकेदार सुधरेंगे।
शैलेश सिंह, शहरवासी।
बस्ती में मिले कब्जाधारकों को पट्टा
मलिन व गरीबों की बस्ती में जो जहां बसा है। उसे वहां पट्टा दिया जाए। मुख्यमंत्री पट्टा देने की बात करते हैं। लेकिन अधिकारी गरीबों से जमीन छिन रहे हैं। आवास देने का झूठा दिलासा दिलाया जा रहा है। इस समस्या को भी मुद्दे के रूप उठाया जाना चाहिए।
मुन्नालाल, शहरवासी।
स्वास्थ्य का है बुरा हाल
शहर में अन्य अव्यवस्थाओं के साथ स्वास्थ्य का भी बुरा हाल है। कहने को तो रीवा में सबसे बड़ा अस्पताल है। लेकिन चिकित्सकों की लापरवाही से मरीजों को इलाज नहीं मिल रहा है। चिकित्सक निजी प्रैक्टिस कर रहे हैं। इस पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।
अनिल सिंह गहरवार, गायत्रीनगर।
सीवर लाइन निर्माण में मनमानी
वर्षों बाद सीवर लाइन का निर्माण किया तो जा रहा है। लेकिन भविष्य को ध्यान में नहीं रखा गया है। सीवर लाइन में जो पाइप डाली जा रही है। वह कुछ वर्षों बाद ही निरर्थक हो जाएगी। जो समस्या अभी झेलना पड़ रहा है। फिर से वही समस्या झेलना पड़ेगा।
नीतेश पाण्डेय, शहरवासी।
पेयजल भी नहीं है शुद्ध
मीठा जल के नाम पर जो पेयजल मिल रहा है। वह शुद्ध नहीं है। पानी पीने से लोगों को पेटजनित रोग हो रहे हैं। पानी की कभी कोई जांच नहीं कराई जाती है। यह मुद्दा उठाया जाना चाहिए। हर मुहल्ले में सप्लाई किए जा रहे पेयजल की बीच-बीच में परीक्षण किया जाना चाहिए।
केके मिश्रा, शहरवासी।
जूनियर डॉक्टर के भरोसे अस्पताल
संजय गांधी अस्पताल हो या जिला अस्पताल। जूनियर डॉक्टर के भरोसे चल रहा है। सीनियर डॉक्टर बंगले पर और क्लीनिक पर मोटी फीस लेकर मरीज देखते हैं। जब कोई रसूखदार जाता है। तभी अस्पताल पहुंचते हैं। ऐसा हो कि प्राइवेट प्रैक्टिस बंद हो जाए।
रमेश तिवारी, शहरवासी।
समस्याओं का नहीं है अंत
पेयजल की समस्या से जूझ ही रहे थे। सीवर लाइन की समस्या भी शहर में खड़ी हो गई। कहा जाता है कि पूरे शहर में मीठा जल उपलब्ध कराया जा रहा है। सब कुछ हवाहवाई है। सबसे पहले यह सुविधा शहरवासियों को उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
अवधेश सिंह, शहरवासी।
सारा ध्यान कमीशन पर
शहर में विकास तो हो रहा है। लेकिन लोगों की सहूलियत के लिए नहीं। बल्कि कमीशन के लिए। विकास लोगों की सहूलियत के लिए होना चाहिए। समस्याएं तभी दूर होगी, जब पब्लिक के लिए कार्य किया जाएगा। मुझे नहीं लगता है कि ऐसा हो पाएगा।
गरूण सिंह, शहरवासी।
पैदल चलने को नहीं है फुटपाथ
शहर में पैदल चलने को सुव्यवस्थित फुटपाथ नहीं है। इस बारे में कोई नहीं सोच रहा है। ठेकेदार सडक़ बनाकर फुटपाथ को बदहाल स्थिति में ही छोड़ देते हैं। जबकि निर्माण में वह भी शामिल होता है। इस बिन्दु पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
प्रदीप पटेल, शहरवासी।
यातायात की व्यवस्था का बुरा हाल
शहर में फुटपाथ पर अतिक्रमण के चलते यातायात की व्यवस्था का बुरा हाल है। चारों तरफ फुटपाथ पर कब्जा है। आटो सहित अन्य वाहनों के लिए कोई रूट निर्धारित नहीं है। शहर की आबादी बढ़ रही है। लेकिन व्यवस्था जैसी की तैसी ही है।
राजेश सिंह, शहरवासी।
ठेला वालों के लिए व्यवस्था नहीं
पूरे शहर में ठेला वालों के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। हॉकर्स जोन में कब्जा है। वाहन स्टैंड भी कब्जा से बचा नहीं है। जिम्मेदार सो रहे हैं। ठेला वालों के लिए बेहतर व्यवस्था हो जाए तो स्थिति कुछ सामान्य हो। यातायात की व्यवस्था भी सुदृढ़ हो जाए।
गजेंद्र गौतम, शहरवासी।
वार्डों में हो इलाज की सुविधा
लोगों को छोटी-छोटी बीमारी के लिए अस्पताल जाना पड़ता है। बेहतर हो कि वार्डों में चिकित्सा सुविधा की व्यवस्था हो। कम से कम छोटी-छोटी बीमारियों का इलाज वार्ड क्लीनिकों में हो जाना चाहिए। यह व्यवस्था हुई तो अस्पतालों का भार कम हो जाएगा।
लक्ष्मीकांत पाण्डेय, शहरवासी।
कुछ मोहल्लों तक सीमित सफाई
स्वच्छता के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च कर दिए गए हैं। लेकिन सफाई केवल कुछ मोहल्लों तक सीमित है। कई स्थानों पर कूड़ा उठाने वाला भी नहीं पहुंचता है। केवल गाना बजाने में बजट खर्च हो रहा है। लोगों को कूड़ा फेंकने के लिए दूर जाना पड़ता है।
पिंटू सिंह, शहरवासी।