
रीवा। मध्यप्रदेश में भ्रष्टाचार चरम पर पहुंच रहा है। हर विभाग में पीडि़तों को रिश्वत के लिए परेशान किया जा रहा है। सबसे अधिक भ्रष्टाचार राजस्व विभाग में है, जहां पर आए दिन कर्मचारियों को रिश्वत लेते हुए पकड़ा जा रहा है। भूमि के दस्तावेज सुधारने के नाम पर राजस्व विभाग के कर्मचारियों की मनमानी खुलेआम चल रही है। शहर के नजदीक इटौरा बायपास से लगी भूमि के दस्तावेजों में सुधार के नाम पर हल्का पटवारी रिश्वत मांग रहा था। पटवारी ने भूमि स्वामी से यह कहते हुए पांच लाख रुपए की रिश्वत मांगी थी कि उक्त भूमि करोड़ों रुपए की है। दस्तावेज सुधार के बाद उसका मूल्य कई गुना बढ़ जाएगा, इस कारण बिना रुपयों के वह कोई कार्यवाही आगे नहीं बढ़ाएगा।
शहर के नजदीक बरा कोठार निवासी निशांत पाण्डेय ने हल्का पटवारी प्रमोद तिवारी द्वारा मांगी जा रही रिश्वत की शिकायत की। मोबाइल में रिकार्ड किए गए आडियो भी लोकायुक्त अधिकारी को सुनाए गए। जिसके बाद लोकायुक्त एसपी ने एक टीम गठितकर आरोपी को रंगे हाथ पकडऩे का निर्देश दिया।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम का प्रकरण दर्ज
शहर के खुटेही मोहल्ले में अपने आवास पर पटवारी ने रुपए लेकर बुलाया था। फरियादी उसके घर ३५ हजार रुपए लेकर पहुंचा और पटवारी को जैसे दिया, उसी दौरान लोकायुक्त की टीम पहुंच गई और रंगे हाथ धर दबोचा। आरोपी पटवारी प्रमोद तिवारी के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7, 13(1)डी एवं 13(2) के तहत प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना शुरू किया है।
एसडीएम ने भूमि सुधार का दिया था निर्देश
शिकायतकर्ता ने बताया कि उनके पिता मोतीलाल पाण्डेय बरा कोठार की १.६२ एकड़ भूमि में की गई तकनीकी त्रुटियों को सुधार के लिए तहसील में मुकदमा लड़ रहे थे। नवंबर 2017 में उनकी मौत के बाद पक्षकार बना और पेशी पर उपस्थित होने लगा। बीते 15 फरवरी को एसडीएम ने भूमि में सुधार के लिए निर्देश तहसीलदार को दिया, जिन्होंने पटवारी को मामला सौंपा और वह सौदा करने लगा।
40 हजार में तय हुआ था सौदा
आरोपी पटवारी पहले छह लाख रुपए मांग रहा था लेकिन बाद में पांच लाख पर अड़ा रहा। उसने कहा कि पहला काम जमीन की इत्तलाबी का है, जिसके लिए 60 हजार रुपए लगेंगे। बाद में किश्तों में जैसे-जैसे रकम देता जाएगा उसी आधार पर सीमांकन और अन्य कार्य होंगे। शिकायतकर्ता के अनुरोध पर 40 हजार में बात तय हुई और पटवारी ने खुटेही मोहल्ले में अपने घर पर बुलाया था। जहां पर 35 हजार रुपए लेते पकड़ा गया। पहले तो वह टीम पहुंचने का विरोध कर रहा था लेकिन सशस्त्र बल भी मौजूद था जिसके चलते वह शांत हुआ।
दिल्ली में नौकरी करता है शिकायतकर्ता
पिता के निधन के बाद शिकायतकर्ता निशांत पाण्डेय को ही बतौर पक्षकार उपस्थित होना पड़ रहा था। वह दिल्ली में एयरफोर्स में कार्यरत है। छुट्टियां भी कम मिलती हैं। इस कारण पटवारी इसका भी फायदा उठाने का प्रयास कर रहा था। उसने कहा भी था कि रुपए नहीं दोगे तो बार-बार आने जाने में बड़ी रकम खर्च होगी।
कार्रवाई के बाद चल रही विवेचना
लोकायुक्त के एसपी संजीव सिन्हा ने बताया कि पटवारी के विरुद्ध शिकायत मिली थी कि वह पांच लाख रुपए मांग रहा है। टीम भेजी गई थी जिसने 35 हजार रुपए लेते हुए ट्रेप किया है। आरोपी के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के तहत प्रकरण दर्ज कर विवेचना की जा रही है।