रीवा

एमपी के इस शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेज में आसानी से मिल सकता है प्रवेश, रजिस्ट्रेशन के लिए बचे चंद दिन

आप भी कर सकते हैं प्रयास...
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Updated: 28 Jul 2018, 2:11 PM IST
Seat vacant, Rewa Engineering College, student admission, registration
Seat vacant, Rewa Engineering College, student admission, registration

रीवा। शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेज में प्रवेश का पहला चरण खत्म होने के बाद आधी सीट खाली रह गई हैं। पांच ब्रांचों की निर्धारित 300 सीट में केवल 153 प्रवेश हुए हैं। ऐसे में बाकी बची सीटों पर प्रवेश के लिए छात्रों के पास पर्याप्त मौका है।

प्रवेश प्रक्रिया में सीएलसी राउंड को किया गया शामिल
शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेज के अलावा निजी कॉलेजों में भी काफी सीट खाली हैं। छात्र प्रवेश प्रक्रिया की निर्धारित प्रक्रिया को अपनाते हुए प्रवेश ले सकते हैं। छात्रों के पास दूसरे चरण की प्रवेश प्रक्रिया में शामिल होने के लिए दो दिन का मौका है। हालांकि इसके बाद कॉलेज लेवल काउंसिलिंग में भी छात्रों को प्रवेश लेने का मौका मिलेगा।

दूसरे चरण में 30 जुलाई है पंजीयन की आखिरी तारीख
कॉलेज प्राचार्य डॉ. बीके अग्रवाल के मुताबिक बची सीटों पर प्रवेश के लिए छात्र 30 जुलाई तक ऑनलाइन पंजीयन कर सकते हैं। पंजीयन करने वालों को दो अगस्त को सीट एलाट की जाएगी और तीन अगस्त से प्रवेश शुरू हो जाएगा। दूसरे चरण में 10 अगस्त तक प्रवेश प्रक्रिया चलेगी।

दो दिन की होगी सीएलसी राउंड में प्रवेश प्रक्रिया
कॉलेज प्राचार्य के मुताबिक दूसरे चरण के बावजूद ब्रांचों में सीट खाली रह जाती है तो 13 व 14 अगस्त को कॉलेज लेवल काउंसिलिंग की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इसके लिए छात्रों को कॉलेज में आवेदन करना होगा। कॉलेज लेवल काउंसिलिंग में केवल हायर सेकंडरी उत्तीर्ण छात्र ही शामिल हो सकेंगे।

शासकीय कॉलेज में पांच ब्रांच है उपलब्ध
गौरतलब है कि शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेज में अब की बार पांच ब्रांचों के लिए प्रवेश हो रहा है। पहले कॉलेज में केवल चार ब्रांच उपलब्ध रही है। इस बार से कंप्यूटर साइंस ब्रांच भी शुरू की गई है। इस बार कॉलेज में सिविल, मैकेनिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्यूनिकेशन व इलेक्ट्रिकल के अलावा कंप्यूटर साइंस ब्रांच में भी प्रवेश लिया जा रहा है।

पहले चरण में ज्यादातर छात्र चले गए बाहर
खुद कॉलेज के अधिकारी इस बात को स्वीकार कर रहे हैं कि जेइइ 1.5 लाख रैंक के भीतर वाले सारे छात्रों को बड़े शहरों के कॉलेजों में चले गए। यही वजह है कि पहले चरण की प्रवेश प्रक्रिया में कॉलेज की केवल 153 सीट ही भर पाई। छात्रों के बाहर चले जाने की स्थिति में मेधावी योजना के तहत यहां प्रवेश लेने वाले छात्रों की संख्या भी काफी कम है।

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