रीवा

एसजीएमच में तीन करोड़ की मशीन खराब, रेडियोथेरेपी के लिए कराह रहे कैंसर पीडि़त

बजट के अभाव मुंबई से नहीं आया टीटमेंट प्लानिंग सिस्टम, लापरवाह बने जिम्मेदार, विंध्य के सबसे बड़े हॉस्पिटल संजय गांधी अस्पताल में कैंसर पीडि़तों की नहीं हो रही रेडियोथेरेपी, तड़प रहे मरीज

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Feb 21, 2020
SGMH is suffering from cancer for radiotherapy

रीवा. विंध्य के सबसे बड़े हॉस्पिटल संजय गांधी अस्पताल में तीन करोड़ रुपए की मशीन का टीटमेंट प्लानिंग सिस्टम खराब हो गया है। मशीन खराब होने कारण कैंसर पीडि़तों की रेडियोथेरेपी नहीं हो पा रही। जिसके चलते कैंसर यूनिट में कैंसर पीडि़त इलाज नहीं होने से बीमारी को लेकर कराह रहे हैं। हैरान करने वाली बात तो यह कैंसर यूनिट में रेडियोथेपी के लिए दूर-दूर से पहुंच रहे मरीजों को एक माह से इलाज के लिए परेशान होना पड़ रहा है। बावजूद इसके जिम्मेदार लापरवाह बने हैं।

कोबाल्ड मशीन बनाने के लिए भेजा मुंबई
एसजीएमएच में कैंसर मरीजों की रेडियोथेरेपी यानी सेकाई के लिए तीन करोड़ रुपए से ज्यादा कीमत की कोबाल्ड मशीन लगाई गई है। मशीन एक फरवरी से काम करना बंद कर दिया है। बताया गया कि मशीन में टीमेंट प्लानिंग सिस्टम को रेगुलेट नहीं किया गया। जिसके कारण मशीन रेडियोथेरेपी का काम करना बंद कर दी है। जिम्मेदारों ने मशीन के केलीब्रेशन के लिए मशीन के पार्ट को मुंबई स्थित एइआरटी भेजा गया है। मशीन के पार्ट के लिए करीब दस लाख रुपए का खर्च है। लेकिन, बजट के अभाव में मशीन के पार्ट का कैलीब्रेशन नहीं हो पा रहा है।

अस्पताल प्रबंधन की अनदेखी से लौट रहे मरीज
जिम्मेदारों की अनदेखी के चलते कैंसर यूनिट में सेकाई के लिए पहुंच रहे मरीजों को इलाज नहीं मिल पा रहा है। कैंसर यूनिट में मरीज इलाज के अभाव में कराह रहे हैं। रेडियोथेरेफी कराने के लिए सतना से पहुंची सियाकुमारी साकेत सहित रीवा निवासी अशोक साकेत, मुनौव्वल अली खान को बैरंग लौटना पड़ा। पूछने पर मरीजों ने बताया कि एक फरवरी से कैंसर यूनिट में रेडियोथेरेपी नहीं हो रही है। कई बार लौटना पड़ा। भाड़ा किराया लगाकर जैसे-तैसे अस्पताल पहुंचे। बगैर सेकाई कराए लौटना पड़ा।

हर रोज कैंसर यूनिट में सेकाई के लिए पहुंच रहे मरीज
ये कहानी अकेले सियाकुमारी की नहीं बल्कि 36 से अधिक कैंसर पीडि़त मरीज रेडियोथेरेपी के लिए कैंसर यूनिट में आते हैं। जिम्मेदारों की अनदेखी के चलते वार्ड में मरीज तड़प रहे हैं।एसजीएमएच में पीपीपी मॉडल पर कैंसर यूनिट संचालित हो रही है। अस्पताल प्रबंधन, कैंसर यूनिट के विभागाध्यक्ष और यूनिट संचालक की अनदेखी के चलते कैंसर मरीजों को इलाज नहीं मिल रहा है। जिसे लेकर मरीजों ओर तीमारदारों में असंतोष है।

कैंसर यूनिट में तड़प रहे मरीज
संजय गांधी अस्पताल के कैंसर यूनिट में पिछले कई दिनों से कैंसर पीडि़त मरीजों की सेकाई नहीं होने से मरीज तड़प रहे हैं। इसके आलावा कैंसर यूनिट वार्ड में भर्ती 40-45 मरीज बेड पर कराह रहे हैं। भर्ती मरीज कीमोथेरेपी को लेकर भी परेशान हैं। वार्ड में भर्ती कई मरीजों ने बताया कि कीमोथेरेपी के बाद सेकाई में कराने में दिक्कत हो रही है। मरीजों ने बताया कि कर्मचारी यह कहकर वापस कर रहे हैं कि मशीन काम करना बंद कर दिया है। इस लिए रेडियोथेरेपी नहीं हो रही है।

पांच साल से पीपीपी मॉडल पर संचालित हो रही कैंसर यूनिट, भुगतान लंबित
संजय गांधी अस्प्ताल में पीपीपी मॉडल पर वर्ष 2015-16 से कैंसर यूनिट संचालित हो रही है। करीब पांच साल से संचालित कैंसर यूनिट के चलते विंध्य के कैंसर पीडि़तों को इलाज के लिए सहूलियत मिली। लेकिन, वर्ष 2018 से लेकर अब तक कैंसर यूनिट संचालक और अस्पताल प्रबंधन के बीच नियम-कायदे के पेंच के चलते ढाई करोड़ रुपए से ज्यादा का भुगतान लटका हुआ है। आयुष्मान योजना के तहत सबसे ज्यादा बकाया है। भुगतान लंबित होने के कारण इसका असर मरीजों पर पड़ रहा है।

वर्जन...
मशीन खराब नहीं है, टीटमेंट प्लानिंग सिस्टम की प्रक्रिया प्रोसेस में है। कैलिब्रेशन के लिए भेजा गया है। विभाग की ओर से मशीन को एक निजी संस्था को चलाने के लिए दिया गया है। संभावना है कि एक मार्च से चालू हो जाएगी।
डॉ प्रियंक शर्मा, प्रभारी विभागाध्यक्ष कैंसर यूनिट

यूनिट में मरीजों को इलाज मिल रहा है। हां यह बात सही है कि कुछ दिन से रेडियोथेरेपी की दिक्कत है, जल्द ही रेडियोथेरेपी की व्यवस्था भी चालू हो जाएगी।
योगेश शुक्ला, कैंसर यूनिट संचालक

Published on:
21 Feb 2020 12:35 pm
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