रीवा और सतना का मामला...
रीवा। बजट के अभाव में सतना और रीवा के बारह मूक-बधिर बच्चे कांंक्लियर इम्प्लांट सर्जरी का इंतजार छह महीने से कर रहे हैं। मामले में मेडिकल कॉलेज के इएनटी विभाग से संबंधित सीएमएचओ को कई बार पत्र लिखे गए थे। लेकिन सर्जरी को लेकर अधिकारी संजीदा नही हैं। बताया जा रहा है कि कई बच्चे ऐसे हैं जिनकी दो महीने के भीतर सर्जरी नहीं की गई तो तय उम्र पार कर जाएंगे।
बहरेपन के शिकार मूक बधिर बच्चे भी सामान्य बच्चों की तरह सुन और बोल सकें। इसके लिए विंध्य क्षेत्र के लिए श्यामशाह मेडिकल कॉलेज के गांधी स्मारक चिकित्सालय को कांक्लियर इम्प्लांट सर्जरी का नोडल सेंटर बनाया गया है। यहां पर सर्जरी के लिए सुविधाएं सरकार ने मुहैया कराई है। कांक्लियर इम्प्लांट सर्जरी के लिए रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर जिले से स्थानीय जिला स्वास्थ्य अधिकारियों के द्वारा बच्चों को चिह्नित किया गया है। रीवा और सतना के बारह बच्चों में कांक्लियर इम्प्लांट सर्जरी के लिए क्षेत्रीय संचालक स्वास्थ्य सेवाएं रीवा ने दिसंबर 2017 में आदेश दे दिया था। रीवा और सतना के सीएमएचओ को बजट मुहैया कराना था। लेकिन इसमें लापरवाही बरती गई। जिसके चलते बीते छह महीने से बच्चे सर्जरी का इंतजार कर रहे हैं। गांधी स्मारक चिकित्सालय के इएनटी विभागाध्यक्ष डॉ. सुरेंद्र मोपाची ने बताया कि इस मामले में संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखा गया है। उनका कहना है कि कांक्लियर इम्प्लांट सर्जरी की उम्र निर्धारित है। सात साल की उम्र तक ही यह सर्जरी की जा सकती है। जितनी कम उम्र होती है उतने अच्छे परिणाम होते हैं।
तीन इम्प्लांट मौजूद, दो सर्जरी प्रस्तावित
इएनटी विभागाध्यक्ष ने बताया कि कांक्लियर इम्प्लांट के लिए सीएमएचओ कार्यालय से बजट मिलता है। जिसके बाद इम्प्लांट क्रय किए जाते हैं। वर्तमान में तीन इम्प्लांट मौजूद हैं। जिसे देखते हुए सतना के नौजिया खान और चुरहट सीधी के आयुष यादव की सर्जरी प्रस्तावित की गई है।उन्होंने कहा कि 30 जुलाई की तारीख दी गई है।
एक सर्जरी पर करीब साढ़े छह लाख का खर्च
कांक्लियर इम्प्लांट की एक सर्जरी पर करीब साढ़े छह लाख रुपए का खर्चा आता है। पहली किस्त में पांच लाख बीस हजार रुपए दिए जाते हैं। जिससे निर्धारित कंपनी से कांक्लियर इम्प्लांट की खरीदी कर सर्जरी को अंजाम दिया जाता है। दूसरी किस्त बाद में आती है। सर्जरी के बाद करीब एक साल तक बच्चे को स्पीचथैरेपी का कोर्स दिया जाता है और बीच-बीच में जांचे भी होती हैं। पूरा खर्च सरकार वहन करती है।