- जलसंसाधन विभाग प्रदूषण हटाने की कार्ययोजना केन्द्र सरकार को भेजेगा- 25 फरवरी को दिल्ली में देश भर की नदियों के प्रदूषण को लेकर होगी चर्चा
रीवा। प्रदूषित नदियों को बचाने के लिए एक बार फिर मुहिम तेज की जा रही है। अब राष्ट्रीय हरित अभिकरण प्रिंसिपल बैच नई दिल्ली द्वारा इसकी समीक्षा की जाएगी। केन्द्र सरकार ने इसी के तहत मध्यप्रदेश की २२ प्रदूषित नदियों की रिपोर्ट तलब की है। इसमें रीवा शहर की भी बिछिया नदी को सबसे अधिक प्रदूषित नदियों में शामिल किया गया है। साथ ही चाकघाट में टोंस नदी को भी दूषित माना गया है।
बिछिया नदी बीते कई वर्षों से तेजी के साथ प्रदूषित हो रही है। बरसात के अलावा अन्य मौसम में इसकी धार बंद हो जाती है। रीवा शहर में मौजूद नदी के हिस्सी गहराई अधिक होने की वजह से यहां पर गर्मी में भी पानी मौजूद रहता है। शहर में इसमें पानी रहने की दूसरी वजह गंदी नालों का मिलना भी है। शहर के कई मोहल्लों से निकलने वाली नालियां बड़े नालों में मिलती हैं और ये नाले बिछिया नदी में मिल रहे हैं। नालों का पानी इतना अधिक प्रदूषित है कि पानी में आक्सीजन सहित अन्य कई प्रमुख तत्वों की कमी हो गई है। इस नदी का पानी अब सीधे उपयोग करने के लायक नहीं है। नदी में नहाने से खुजली और चर्मरोग हो रहे हैं।
बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए केन्द्र के जलशक्ति मंत्रालय द्वारा देश भर की नदियों के प्रदूषण की समीक्षा के लिए दल गठित किया गया है। इसमें मध्यप्रदेश की 22 नदियों को चिन्हित किया गया है जिसमें रीवा की बिछिया नदी प्रमुख है। हाल ही में केन्द्र सरकार ने मध्यप्रदेश सरकार से सभी नदियों की रिपोर्ट मांगी है।
जिसकी वजह से अब गंगा कछार के चीफ इंजीनियर से वर्तमान स्टेटस और अब तक किए गए प्रयासों पर रिपोर्ट मांगी गई है। रीवा संभाग की तीन नदियां सबसे अधिक प्रदूषित नदियों में चिन्हित की गई हैं। जिसमें रीवा शहर में बिछिया, चाकघाट में टोंस नदी के साथ ही चित्रकूट की मंदाकिनी शामिल हैं।
- नोडल अधिकारी ने की लापरवाही, अब सीएस देंगे प्रजेंटेशन
जलसंसाधन विभाग ने रीवा सहित प्रदेश की प्रदूषित नदियों वाले जिलों में नोडल अधिकारी की नियुक्ति की थी। इन्हें समय पर रिपोर्ट प्रस्तुत करना था। इन अधिकारियों की उदासीनता की वजह से अब केन्द्र सरकार ने प्रदेश के मुख्य सचिव को पूरी जानकारी के साथ उपस्थित होने के लिए कहा है। आगामी २५ फरवरी को दिल्ली में होने वाली समीक्षा बैठक में मध्यप्रदेश की २२ प्रदूषित नदियों पर चर्चा होगी। जलसंसाधन विभाग के क्योंटी नहर संभाग के कार्यपालन यंत्री मनोज तिवारी ने बताया है कि कुछ समय पहले ही इसकी रिपोर्ट तैयार की थी। जिसे प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सौंप दिया है, ताकि नदी को प्रदूषण से बचाने के लिए प्रयास किए जाएं।
- नदी संरक्षण के लिए सीवरेज प्रोजेक्ट
रीवा शहर में 214.10 करोड़ रुपए की लागत से सीवरेज प्रोजेक्ट पर कार्य प्रारंभ किया गया है। इससे बिछिया नदी में मिलने वाले शहर के नालों को सीधे मिलने से रोकने का प्रयास किया जाएगा। घरों से निकलने वाला पानी अब सीधे सीवर लाइन के जरिए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंचेगा। जहां पर इसके शुद्धीकरण के बाद ही नालों पर छोड़ा जाएगा। पूर्व में बीहर नदी संरक्षण योजना के तहत 28 करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट स्वीकृत हुआ था, जिसमें १२ एमएलडी का ट्रीटमेंट प्लांट बनाया जाना था, इसका अधूरा कार्य रोककर अब सीवरेज प्रोजेक्ट में शामिल कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि जिला पंचायत की ओर से भी नदी संरक्षण के लिए प्रोजेक्ट चलाया जा रहा है लेकिन मैदानी स्तर पर यह नजर नहीं आ रहा है।
- बाणसागर का पानी नदी में जोडऩे की है योजना
बिछिया नदी के पानी का बहाव नहीं होने की वजह से यह प्रदूषित हुआ है। जलसंसाधन विभाग ने कुछ समय पहले ही रिपोर्ट तैयार की है, जिसमें कहा गया है कि क्योंटी नहर में आने वाले बाणसागर बांध का पानी बिछिया में गिराया जाएगा। इसके लिए करीब दो किलोमीटर से अधिक दूरी की नहर बनानी होगी। साथ ही कुछ जगह नदी में स्टापडेम भी बनाने का प्रस्ताव है। बाणसागर का पानी बिछिया में मिलने से इसका प्रवाह शुरू हो जाएगा और जमा हुआ जो प्रदूषित पानी है, वह भी बहने लगेगा। जलसंसाधन विभाग का दावा है कि नदी में नहर के माध्यम से आने वाले पानी की वजह से बीहर नदी जिस तरह निर्मल हो गई है, उसी तरह बिछिया का पानी भी निर्मल हो जाएगा।
- प्रदेश की इन नदियों को प्रदूषित माना गया है
मध्यप्रदेश की २२ नदियों को सबसे अधिक प्रदूषित माना गया है। इन्हें अब प्रदूषणमुक्त करने के लिए केन्द्र सरकार ने भी प्रयास शुरू किया है। इसमें प्रमुख रूप से रीवा की बिछिया, टोंस चाकघाट(रीवा), खान नदी इंदौर, क्षिप्रा उज्जैन, चंबल नदी नागदा(उज्जैन), बेतवा मंडीदीप भोपाल एवं विदिशा, कलियासोत कोलार, ताप्ती बुरहानपुर, गोहद, कटनी नदी, कुंडा नदी खरगोन, मालेनी जौरा, मंदाकिनी चित्रकूट सतना, नेवाज शाजापुर, सिमरार कटनी, वैन गंगा सिवनी, सोन नदी धनपुरी, चामला बडऩगर, पार्वती नदी पीलुखेड़ी, चोपन गुना, कन्हान छिंदवाड़ा आदि हैं।
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नदियों को प्रदूषणमुक्त करने के लिए स्थानीय निकायों द्वारा कार्य किए जा रहे हैं। साथ ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी काम कर रहा है। हमसे कुछ तकनीकी जानकारियां पहले मांगी गई थी। वर्तमान में आए पत्र का अवलोकन नहीं किया है, उसे देखेंगे और जो भी जानकारी चाही गई है, वह भेजी जाएगी।
श्रीकांत दांडेकर, मुख्य अभियंता जलसंसाधन गंगा कछार