सूखा सर्वे को लेकर प्रशासन की ओर से निर्धारित डेडलाइन भी बीत चुकी है और अधिकारियों का सत्यापन भी अंतिम दौर में है। ऐसे में सूखे से चौपट फसल का सर्वे करने पटवारी आएंगे, किसानों में यह उम्मीद नहीं रह गई है। अब किसान सर्वे रिपोर्ट जानने को बेताब हैं कि सूखा राहत के रूप में मिलने वाले मुआवजे से संबंधित सूची में उनका नाम है या नहीं। नियमानुसार सर्वे पूरा करने के बाद रिपोर्ट के आधार पर किसानों की गांववार सूची जारी की जानी है। सूची में किस किसान की कितनी फसल सूखे से प्रभावित हुई है और उसे मिलने वाला संभावित मुआवजा कितना हो सकता है, इस बात की जानकारी होगी। जिसके आधार पर किसान दावा-आपत्ति कर सकेगा। यही वजह है कि सर्वे की आस छोड़ किसान अब रिपोर्ट जानने की फिराक में पड़ गए हैं। पत्रिका एग्रो क्लब से कई गांवों के किसानों ने सर्वे के लिए पटवारी के नहीं पहुंचने की शिकायत की है।
रिपोर्ट पर प्रशासन का पर्दा
खेत-खेत सर्वे में जिस तरह की लापरवाही पटवारियों द्वारा देखने को मिली है। ठीक उसी प्रकार की स्थिति सूची प्रकाशन को लेकर देखने को मिल रही है। शासन की ओर से जारी डेडलाइन के मुताबिक 20 अक्टूबर तक नुकसान की रिपोर्ट भेजा जाना है, लेकिन प्रशासन की ओर से अभी तक यह सूचना जारी नहीं कि जा सकी है कि सर्वे के आधार पर किसानों के फसल नुकसान से संबंधित गांववार सूची कब तक जारी की जा सकेगी। यानी फसल नुकसानी के आधार पर तैयार रिपोर्ट पर किसान कब दावा-आपत्ति कर सकेंगे, यह अभी स्पष्ट नहीं है। दरअसल, जिस तरह से सर्वे में लापरवाही देखने को मिली है उसके मद्देनजर बड़ी संख्या में आपत्ति आने की संभावना है।
देर हुई तो नहीं बचेगा सबूत
किसानों का कहना है सर्वे रिपोर्ट के आधार पर गांववार सूची जारी करने में प्रशासन ने देर की तो उनके पास दावा-आपत्ति के बाद उसे सिद्ध करने के लिए सबूत के तौर पर फसल नहीं बचेगी। क्योंकि न के बराबर उत्पादन की उम्मीद वाले फसल के खेत की किसान जोताई कर रबी की तैयारी कर रहे हैं।
24-25 को चस्पा होगी रिपोर्ट
कलेक्टर राहुल जैन ने कहा, 19 अक्टूबर को राजस्व विभाग की बैठक बुलाई गई है। जिसमें सूखा सर्वे रिपोर्ट पर अधिकारियों-कर्मचारियों के साथ चर्चा की जाएगी। जिसके बाद सत्यापन कर सूची ऑनलाइन कर दी जाएगी। 24 और 25 अक्टूबर को सूखे की रिपोर्ट पंचायतों में चस्पा की जाएगी।