
MBBS बांड पोस्टिंग में मेरिट का खेल बदला (photo source- AI)
MBBS Internship Stipend: प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस के इंटर्न छात्रों को हर माह 30 हजार स्टाइपेंड मिल सकता है। राज्य शासन ने एक कमेटी बनाई थी, जिन्होंने वर्तमान स्टाइपेंड 15900 रुपए को रिवाइज कर 30 हजार किया है। कमेटी ने रिपोर्ट कमिश्नर मेडिकल एजुकेशन (सीएमई) कार्यालय भेज दिया था। कमिश्नर ने भी कमेटी की अनुशंसा तस का जस राज्य शासन को भेज दिया है। उम्मीद की जा रही है कि आने वाले कुछ दिनों में शासन बढ़ा हुआ स्टाइपेंड का आदेश जारी कर सकता है।
मेडिकल कॉलेजों के इंटर्न पिछले 10 दिनों से हड़ताल कर रहे हैं। ये हड़ताल राजनांदगांव, रायगढ़ समेत दूसरे मेडिकल कॉलेजों में चल रही है। रायपुर मेडिकल कॉलेज में ये हड़ताल नहीं चल रही है। स्टाइपेंड की मांग पर कमिश्नर कार्यालय ने मेडिसिन विभाग की एचओडी डॉ.देवप्रिया लकड़ा की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई थी। कमेटी को दूसरे राज्यों से तुलना कर प्रदेश में इंटर्न छात्रों का स्टाइपेंड तय करने को कहा गया था।
पत्रिका को पुख्ता जानकारी मिली है कि कमेटी ने स्टाइपेंड 30 हजार महीना करने की अनुशंसा की है। इसकी पुष्टि कमिश्नर मेडिकल एजुकेशन ने भी की है। गुरुवार को सीएमई से मिलने इंटर्न छात्रों का एक प्रतिनिधि मंडल गया था। प्रतिनिधि मंडल में शामिल इंटर्न छात्रों ने आरोप लगाया था कि कमिश्नर ने उनसे सही तरीके से बात नहीं की।
कमिश्नर ने कहा कि आपकी फीस कई समय से नहीं बढ़ाई गई है, क्या उसे बढ़ा दिया जाए? यह भी कहा गया कि क्या कॉलेजों का हॉस्टल बजट हटा दिया जाए, आपके स्टाइपेंड के लिए? हालांकि पत्रिका से बतचीत में कमिश्नर ने इस तरह की बात से इनकार किया था। हालांकि इस आरोप की वीडियो वायरल है, जिसमें इंटर्न छात्र कमिश्नर की आलोचना कर रहे हैं।
मेडिकल कॉलेजों के जूनियर डॉक्टर यानी पीजी छात्र सितंबर से हड़ताल पर जा सकते हैं। वे भी स्टाइपेंड हर माह एक लाख रुपए से ज्यादा करने की मांग कर रहे हैं। अभी उन्हें 67 हजार से 75 हजार स्टाइपेंड हर माह मिल रहा है। ये दूसरे राज्यों की तुलना में काफी कम है। जूडो का कहना है कि वे अस्पताल की रीढ़ हैं। 24 घंटे बिना ब्रेक के काम करते हैं, लेकिन उन्हें मेहनत की तुलना में कम स्टाइपेंड दिया जा रहा है।
रिवाइज कमेटी ने इंटर्न छात्रों का स्टाइपेंड प्रति माह 30 हजार रुपए करने की अनुशंसा की है। यह अनुशंसा राज्य शासन के पास भेज दी गई है। स्टाइपेंड बढ़ाना राज्य शासन के हाथ में है। छात्रों को हड़ताल से लौट आना चाहिए- रितेश अग्रवाल, कमिश्नर मेडिकल एजुकेशन
Updated on:
15 Aug 2026 11:02 am
Published on:
15 Aug 2026 11:02 am
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