
छत्तीसगढ़ में इंटर्न डॉक्टरों का प्रदर्शन (photo source- Patrika)
Rajnandgaon Medical College: राजनांदगांव जिले के सबसे बड़े सरकारी चिकित्सा संस्थान भारत रत्न स्व. अटल बिहारी वाजपेयी स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय एवं संबद्ध अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था गंभीर संकट के दौर से गुजर रही है। एक ओर अस्पताल में डॉक्टरों और शिक्षकीय अमले के 77 पद वर्षों से खाली पड़े हैं, वहीं दूसरी ओर 125 इंटर्न डॉक्टर सोमवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जा रहे हैं। ऐसे में हजारों मरीजों के इलाज पर सीधा असर पडऩा तय माना जा
रहा है।
मेडिकल कॉलेज प्रबंधन की ओर से हालिया भर्ती विज्ञापन ने स्वास्थ्य व्यवस्था की हकीकत सामने ला दी है। कॉलेज में 10 प्रोफेसर, 18 एसोसिएट प्रोफेसर, 28 असिस्टेंट प्रोफेसर, 16 सीनियर रेजिडेंट और 5 डेमोंस्ट्रेटर के पद रिक्त हैं। यानी मेडिकल शिक्षा और मरीजों के इलाज, दोनों की रीढ़ माने जाने वाले लगभग हर स्तर पर डॉक्टरों की भारी कमी बनी हुई है।
सबसे अधिक 28 असिस्टेंट प्रोफेसर के पद खाली हैं, जबकि यही चिकित्सक ओपीडी, वार्ड, ऑपरेशन और मेडिकल छात्रों के क्लीनिकल प्रशिक्षण की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभालते हैं। इसके अलावा 16 सीनियर रेजिडेंट की कमी का सीधा असर इमरजेंसी सेवाओं और विशेषज्ञ उपचार पर पड़ सकता है।
हालांकि मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने संविदा भर्ती के लिए प्रत्येक माह के द्वितीय और चतुर्थ बुधवार को वॉक-इन इंटरव्यू की व्यवस्था की है, लेकिन स्थायी नियुक्तियों के बिना यह व्यवस्था कितनी कारगर होगी, यह बड़ा सवाल बना हुआ है।
स्थिति इसलिए और गंभीर हो गई है क्योंकि मेडिकल कॉलेज अस्पताल में केवल राजनांदगांव ही नहीं, बल्कि आसपास के जिलों और ग्रामीण क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। पहले से सीमित डॉक्टरों पर काम का अतिरिक्त बोझ है और अब इंटर्न डॉक्टरों की हड़ताल से ओपीडी, वार्ड और अन्य सेवाओं के प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
मामला केवल इलाज तक सीमित नहीं है। मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस विद्यार्थियों की पढ़ाई, क्लीनिकल ट्रेनिंग और अनुसंधान की जिम्मेदारी भी इन्हीं शिक्षकों पर होती है। प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर के कुल 56 पद रिक्त होने से मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
इधर स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर 125 इंटर्न डॉक्टर सोमवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर रहेंगे। इंटर्न डॉक्टरों का कहना है कि वे लंबे समय से स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दे रही। उनका कहना है कि वे ओपीडी से लेकर वार्ड स्तर तक मरीजों की सेवा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, इसके बावजूद उनकी मांगें लगातार अनदेखी की जा रही हैं।
अस्पताल में डॉक्टरों की कमी बनी हुई है। सीजीपीएससी से चयनित डॉक्टर यहां भेजे जाएंगे। इससे कुछ राहत मिलेगी। वॉक-इन-इंटरव्यू डीन ऑफिस से जारी किया गया है। - डॉ. अतुल देशकर, अधीक्षक मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल, राज.
Updated on:
03 Aug 2026 09:45 am
Published on:
03 Aug 2026 09:45 am
