
तिरंगा फहराया या सिर्फ रस्म निभाई? (photo source- Patrika)
@विनोद जैन/Flag Hoisting Controversy: देश आजादी की 80वीं वर्षगांठ मना रहा है। करोड़ों देशवासी तिरंगे को सलाम कर रहे हैं, शहीदों को नमन कर रहे हैं और देशभक्ति के जज्बे में डूबे हैं। लेकिन गोबरा नवापारा में स्वतंत्रता दिवस के दिन ही राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान और ध्वजारोहण की प्रक्रिया को लेकर सरकारी व्यवस्था सवालों के घेरे में आ गई है। एक ओर नगर पालिका परिषद की प्रतिपक्ष नेता ने निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ध्वजारोहण कर राष्ट्रीय ध्वज की गरिमा का सम्मान किया, वहीं दूसरी ओर नगरपालिका, तहसील कार्यालय, गांधी चौक स्थित नगरपालिका के कार्यक्रम और कृषि उपज मंडी के विपणन कार्यालय में ध्वजारोहण की प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
स्वतंत्रता दिवस कोई सामान्य सरकारी कार्यक्रम नहीं है। यह वह दिन है जब देश के वीर सपूतों ने अपना सब कुछ न्योछावर कर हमें आजादी दिलाई। किसी ने फांसी का फंदा चूमा, किसी ने गोलियां खाईं और किसी ने परिवार तक छोड़ दिया। जिस तिरंगे के लिए हजारों लोगों ने अपना जीवन बलिदान कर दिया, उसी तिरंगे को फहराने की प्रक्रिया में सरकारी संस्थानों से लापरवाही सामने आए तो इससे ज्यादा शर्मनाक सवाल और क्या हो सकता है? नगर के जिम्मेदार सरकारी कार्यालयों में यदि ध्वजारोहण की जगह महज झंडा फहराने की औपचारिकता पूरी कर दी गई, तो सवाल सीधा है- क्या अधिकारियों के लिए राष्ट्रीय पर्व भी सिर्फ एक रस्म बनकर रह गया है?
नगर पालिका परिषद की प्रतिपक्ष नेता ने न केवल नियम के अनुरूप ध्वजारोहण किया, बल्कि अपने संबोधन में स्वतंत्रता के वास्तविक अर्थ को भी सामने रखा। उन्होंने कहा कि आजादी हमें उपहार में नहीं मिली। इसके पीछे अनगिनत बलिदान और करोड़ों भारतीयों का संघर्ष है। आज हमारा कर्तव्य है कि हम भारत को मजबूत, शिक्षित, स्वच्छ, सुरक्षित और गौरवशाली बनाने का संकल्प लें। एक जनप्रतिनिधि नियम और परंपरा का पालन कर सकती हैं, तो जिम्मेदार सरकारी कार्यालयों में इसकी अनदेखी क्यों?
नगर के हृदय स्थल गांधी चौक में नगरपालिका द्वारा आयोजित स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में भी ध्वजारोहण की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठना पूरे प्रशासनिक तंत्र के लिए गंभीर विषय है। इसके अलावा तहसील कार्यालय और कृषि उपज मंडी के विपणन कार्यालय में भी यदि निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ, तो यह जानना जरूरी है कि कार्यक्रम से पहले जिम्मेदार अधिकारियों ने क्या तैयारी की थी और क्या किसी ने इसकी निगरानी की? क्या राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान के लिए भी अब अधिकारियों को याद दिलाना पड़ेगा कि 15 अगस्त कोई खानापूर्ति का दिन नहीं है?
यह खबर किसी व्यक्ति विशेष के विरोध में नहीं, बल्कि राष्ट्रीय ध्वज की गरिमा और सरकारी व्यवस्था की जवाबदेही से जुड़ा सवाल है। जिम्मेदार अधिकारियों को स्पष्ट करना चाहिए कि स्वतंत्रता दिवस के दिन ध्वजारोहण की निर्धारित प्रक्रिया का पालन क्यों नहीं हुआ? यदि गलती हुई है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है और भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे? देश के शहीदों ने आजादी के लिए अपना खून दिया था। सरकारी दफ्तरों से कम से कम तिरंगे के सम्मान में पूरी गंभीरता की उम्मीद तो की ही जा सकती है।
Updated on:
15 Aug 2026 11:48 am
Published on:
15 Aug 2026 11:48 am
