रीवा

मौसम की बेरुखी के बीच बोवनी में अपनाएं यह तकनीक तो मिलेगा बेहतर उत्पादन

कृषि वैज्ञानिकों ने जारी की एडवाइजरी...

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Jul 07, 2018
Weather is not suitable for crop sowing, Rewa farmers are worried

रीवा। मौसम की बेरुखी को देखते हुए किसान परेशान हैं। क्योंकि उनके द्वारा धान सहित अन्य दूसरी फसलों की बोवनी करना संभव नहीं हो पा रहा है। सोयाबीन जैसी कई दूसरी फसलों के लिए बोवनी का अब वक्त नहीं बचा है। इसलिए कृषि वैज्ञानिक अब किसानों को फसल व बोवनी की तकनीकी बदलने का सुझाव दे रहे हैं।

वैज्ञानिकों ने जारी किया है सुझाव
कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने किसानोंं को विकल्प सुझाने के लिए बाकायद लिखित रूप में सुझाव जारी किया है। इतना ही नहीं गांवों में उनके द्वारा किसानों को समझाइश भी दी जा रही है। समझाइश ऐसी है कि किसान कम पानी में भी फसल की बोवनी कर सकेंगे।

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सुझाव, धान की सूखी बोवनी करने का
वैज्ञानिक डॉ. अखिलेश कुमार के मुताबिक अभी आवश्यकतानुसार बारिश नहीं हुई है। इसलिए किसानों को धान की रोपाई पद्धति बोवनी करने के बजाए सूखी बोवनी की प्रक्रिया को अपनाना चाहिए। खेत की दो से तीन बार जुताई करने के बाद धान की बोवनी किया जाए। छिटकवा के बजाए धान की कतारबद्ध तरीके से बोवनी कर किसान कम बारिश में अच्छा उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं।

धान की इन किस्मों की करें बोवनी
वैज्ञानिकों के मुताबिक किसान धान की कम दिनों की किस्म दंतेश्वरी, सहभागी धान, जेआर 201 जैसी किस्मों का चयन करना बेहतर होगा। बीज दर 25 किलोग्राम प्रति एकड़ तक हो। बोवनी से पहले धान का बीजोपचार ट्राइसायक्लाजोल नामक फफूंदनाशी से करें। मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का उपयोग किया जाए। डीएपी, म्यूरेट ऑफ पोटाश व जिंक सल्फेट का बोवनी के समय प्रयोग करना बेहतर होगा। खरपतवार प्रबंधन के लिए बिसपायरीबेक सोडियम साल्ट का प्रयोग बोवनी के 20 से 25 दिन बाद करें।

सोयाबीन की बोवनी के लिए अब हो गई देर
किसानों के पास सोयाबीन की बोवनी के अब अधिकतम पांच दिन का शेष है। इसके बाद की गई से उत्पादन पर जबरदस्त प्रभाव पड़ेगा। हालांकि मूंग व उड़द की बोवनी के लिए देर हो चुकी है। लेकिन सोयाबीन की जगह किसान मूंग व उड़द की फसल को विकल्प बना सकते हैं। इसके अलावा बाद में सिंचाई की सुविधा बन सके तो कम पानी की आवश्यकता वाली धान की किस्मों की भी बोवनी कर सकते हैं।

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Published on:
07 Jul 2018 06:10 pm
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