सागर

भानगढ़ में दो जगहों पर मिला 250 बोरी नकली डीएपी खाद, दो भाईयों पर एफआइआर दर्ज

एसडीएम ने की कार्रवाई, अवैध खाद बेचने वालों में मचा हड़कंप, दुकान बंद कर भागे
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Sep 17, 2025
250 bags of fake DAP fertilizer found at two places in Bhangarh, FIR lodged against two brothers
दुकान के अंदर मिला खाद का भंडारण

बीना. कलेक्टर के निर्देश पर मंगलवार की सुबह एसडीएम विजय डेहरिया ने कृषि विभाग के अधिकारियों के साथ ग्राम भानगढ़ में दो जगहों से 250 बोरी डीएपी खाद का अवैध भंडारण जब्त किया। साथ ही जो खाद जब्त की गई है, वह नकली निकली। इसके बाद दो भाईयों पर भानगढ़ थाना में एफआइआर दर्ज कराई गई है।
कृषि विभाग में पदस्थ दीपेश मोघे की तरफ से अनिल कुमार उर्फ पप्पू जैन पिता सनत कुमार जैन और सुरेन्द्र पिता सनत कुमार जैन पर उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 की धारा 4,5,7,8 और धारा 35 के तहत मामला दर्ज कराया गया है। मंगलवार की सुबह सूचना मिलने पर एसडीएम भागनढ़ पहुंचे थे, जहां विद्यासागर हार्डवेयर के सामने स्थित दुकान में ताला डला हुआ था और चाबी उपलब्ध न कराए जाने पर ताला तोड़ा गया, तो अंदर डीएपी की 100 बोरी रखी मिलीं। इसी गांव में खिमलासा रोड पर मकान में करीब 150 बोरी डीएपी खाद मिला। जिसके कृषि विभाग के अधिकारियों ने सैंपल भी लिए हैं। अवैध मकान, जिसमें ओमप्रकाश कुर्मी का कब्जा था, उसके बयान लिए गए। बयानों में बताया गया कि मकान अनिल जैन को किराए पर दिया है और अवैध रूप से खाद का भंडारण भी उनके द्वारा किया गया था। साथ ही 100 बोरियों का दुकान में भंडारण सुरेन्द्र जैन ने किया था। दोनों के पास लायसेंस या किसी प्रकार की दस्तावेज नहीं मिले हैं। खाद जब्त कर लिया गया है।

रेत मिलाकर बनाई गई है खाद
जब्त की खाद में करीब 70 प्रतिशत रेत और अन्य सामग्री मिली हुई है। इस खाद के डालने से फसल खराब हो जाएगी। खाद के सैम्पल लिए गए हैं, जो लैब में जांच के लिए भेजे जाएंगे।

कहां से लाए खाद नहीं दी जानकारी
नकली खाद कहां से आ रही है, इसकी जानकारी भंडारण करने वालों ने प्रशासन को नहीं दी है। साथ ही यह आशंका जताई जा रही है कि डीएपी की बोरियां प्रिंट कराकर स्थानीय स्तर पर ही यह नकली खाद तैयार किया जा रहा है, जिसकी जांच की जाएगी।

यूपी से भी आता है खाद
भानगढ़, खिमलासा सहित यूपी बॉर्डर से लगे आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में यूपी से भी खाद जाता है। यूपी से आने वाले खाद निकली होने की आशंका रहती है और यह किसानों को महंगे दामों पर बेचा जाता है।

Updated on:
17 Sept 2025 12:04 pm
Published on:
17 Sept 2025 12:04 pm