
Sagar News :मध्य प्रदेश के सागर में स्वास्थ्य सुविधाओं की लापरवाही के एक के बाद एक कई नजारे आए दिन सामने आते रहते हैं। लेकिन, इस बार जिले में ऐसा मामला सामने आया, जिसने आपातकालीन एंबुलेंस सेवा 108 और स्वास्थ्य विभाग को कटघरे में खड़ा कर दिया है। पूरा मामला एक मरीज को एंबुलेंस न मिलने से जुड़ा है। जब मरीज को घंटों इंतजार के बाद एंबुलेंस नहीं मिली तो मजबूरन उसके घर वालों को लोडिंग ऑटो में ऑक्सीजन सिलेंडर बांधकर 85 साल के बुजुर्ग को जिला अस्पताल तक लाना पड़ा।
दरअसल, ये पूरा मामला जिले के शाहपुर स्वास्थ्य केन्द्र से जुड़ा है। जहां 85 वर्षीय दुली अहिरवार, निवासी शाहपुर को सांस लेने में तकलीफ के साथ सीने में दर्द उठ गया। घर के लोग उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शाहपुर लेकर पहुंचे। यहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। रेफर होने का मतलब ये है कि, स्वास्थ्य केंद्र ने अपने स्तर पर उपचार कर दिया, अब आगे का उपचार जिला अस्पताल में ही मिलेगा। ऐसे में बुजुर्ग पीड़ा से कराह रहे थे और अस्पताल से जिला अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस तक नहीं थी।
मरीज के परिजन रामकिशन अहिरवार ने बताया कि, उनके द्वारा एंबुलेंस को कई बार काल किया गया, लेकिन, लंबे इंतजार के बाद भी एंबुलेंस नहीं आई। ड्यूटी पर मौजूद डाक्टरों ने भी एंबुलेंस को काल किया, पर उनके कहने के बाद भी एंबुलेंस नहीं आई। ऐसे में पिता की पीड़ा को देखते हुए मजबूरन उन्होंने लोडिंग ऑटो में ही ऑक्सीजन सिलेंडर रखकर ज़िला अस्पताल के लिए रवाना हुए। रामकिशन के अनुसार, ऑक्सीजन सिलेंडर अस्पताल से मिला था, लेकिन अस्पताल का कोई स्टाफ साथ में नहीं गया। रामकिशन ने बताया कि उसी के मालवाहक में एक अन्य मरीज को भी बुंदेलखंड मेडीकल कॉलेज रेफर किया था। उसे भी उसी साथ लेकर बुंदेलखंड मेडीकल कॉलेज छोड़ा।
सवाल एक बार फिर वही है कि, आपातकालीन स्थिति में मिलने वाली एंबुलेंस सुविधा आखिर है कहां? एंबुलेंस मिलने वाली सरकार के सभी दावों के पोल खोलती हुई नजर आ रही है। साथ ही, एंबुलेंस के निगरानी व्यवस्था पर भी बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।