पत्रिका के अमृतं जलम् अभियान के तहत बुधवार को झील संरक्षण के उद्देश्य से फिर शहर के जलदूत लाखा बंजारा झील के भट्टोघाट पर पहुंचे और श्रमदान किया।
सागर. हम चाहे कितने ही धनवान या बलवान क्यों न हो जाएं, लेकिन यदि पानी न मिले तो धन और बल का भी कोई सुख नहीं मिल सकता। जल नहीं तो जीवन संभव नहीं है। ऐसे में हमें धनवान और बलवान होने के साथ ही जलवान भी होना होगा। पानी बनाया नहीं जा सकता, इसलिए हमें प्राकृतिक जल स्रोतों को सहेजने, संवारने के साथ जल को संरक्षित करना होगा।
पत्रिका के अमृतं जलम् अभियान के तहत बुधवार को झील संरक्षण के उद्देश्य से फिर शहर के जलदूत लाखा बंजारा झील के भट्टोघाट पर पहुंचे और श्रमदान किया। अलसुबह से ही उत्साही श्रमदानियों का कारवां घाट पर पहुंचने लगा था और सुबह ८ बजे तक अच्छी खासी संख्या में श्रमदान एकत्रित हो गए थे। खास बात यह रही कि नन्हे श्रमदानियों ने भी पसीना बहाया।
इन्होंने किया श्रमदान
श्रमदान में संजोग समिति के अनिल जैन 'नैनधारा, प्रशान्त जैन सानोधा, रजनीश जैन डीसेंट, संजय जैन लाटसाहब, जित्तू जैन, आशीष बाछल, सपन जैन, प्रिंस जैन, अंकुश जैन, मुकेश जैन खमपुआ, सचिन जैन स्पोट्र्स, अरविंद जैन पथरिया, मनीष नायक के साथ आर्ष परिषद के डॉ. ऋषभ भारदाज, जयेश उपाध्याय, सूर्यकांत द्विवेदी, विनोद रैकवार, शिवम रैकवार, प्रदीप ठाकुर, सन्तोष रैकवार सहित एडवोकेट डॉ. धर्णेन्द्र जैन, पप्पू तिवारी, राजू भाई गर्ग, दीपक दुबे, मनीष दुबे विक्रम केशरवानी और नन्हे श्रमदानियों में राजीव यादव, चेतन सोनी, विश्वास सोनी, सार्थक शुक्ला शामिल रहे। गुरुवार को केसरवानी समाज द्वारा श्रमदान किया जाएगा।
कविता से भरा जोश
श्रमदान के दौरान राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित संस्कृत के मूर्धन्य विद्वान स्वर्गीय पं प्रेमनारायण द्विवेदी की रचना का डॉ. ऋषभ भारद्वाज ने पाठ किया।
अपना सागर ताल बचाओ,
अरे तरुण अब उठ जाओ।
अपना सागर ताल बचाओ।।
जल का बढ़ता त्रास मिटाओ,
फिर सरोवर को स्वर्ग बनाओ।।
लाखा बंजारा धन्य-धन्य,
जिसका है यह अतुल पुण्य।
पशु-पक्षी नर भए धन्य,
उनके भी जागे पूर्व पुण्य।।