शहर में करीब एक लाख से ज्यादा नल कनेक्शन हैं। इनमें से मात्र 32 हजार ही वैध नल कनेक्शन हैं। इनमें से भी निगम सबसे वसूली नहीं कर पा रहा है।
सागर. नगर निगम प्रशासन शहर की जनता के साथ सालों से धोखाधड़ी कर रहा है। राजघाट बांध से उपभोक्ताओं को 15 दिन ही जलापूर्ति की जाती है लेकिन निगम का जलप्रदाय विभाग उपभोक्ताओं को 30 दिनों का बिल थमा देता है। निगम फर्जीवाड़ा करने के साथ ईमानदार उपभोक्ताओं को परेशान भी कर रहा है। शहर में करीब एक लाख से ज्यादा नल कनेक्शन हैं जिसमें मात्र 32 हजार ही वैध नल कनेक्शन हैं। इनमें से भी निगम प्रशासन सबसे वसूली नहीं कर पाता है। पानी पर आरक्षण लगाने की बड़ी चूक करने वाला निगम प्रशासन एेसे हितग्राही जो वित्तीय वर्ष के आखिर तक पैसा जमा नहीं करते हैं, उन्हें स्कीम के तहत राहत दे देता है जबकि ईमानदार उपभोक्ता पूरे साल का पैसा एडवांस में इस मकसद से जमा कर देते हैं कि उन्हें एक महीने के जलकर की राशि में छूट मिल जाती है।
घाटे में चल रही परियोजना
राजघाट परियोजना के संचालन में प्रति माह करीब एक करोड़ रुपए से ज्यादा का खर्च आता है। वहीं पूरी परियोजना पर निगम को 12 करोड़ रुपए खर्च करने पड़ते हैं जबकि जलकर की डिमांड के विरुद्ध निगम प्रशासन मुश्किल से 4 से 5 करोड़ की राशि ही वसूल पाता है।
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इस प्रकार से बिल की वसूली की जाना जनता के साथ धोखा है। जितना पानी दे रहे हैं, उतना ही पैसा लिया जाना चाहिए। आगामी परिषद की बैठक में इस मामले को गंभीरता से उठाएंगे।
अजय परमार, नेता प्रतिपक्ष, ननि
शहर और मकरोनिया में 70 प्रतिशत से ज्यादा नल कनेक्शन अवैध हैं, जिनको वैध करने की कार्रवाई जल्द ही शुरू कर रहे हैं। जिस दिन 80 प्रतिशत नल कनेक्शन भी वैध हो जाएंगे उस दिन निगम की आय भी बढक़र 4-5 करोड़ से सीधे 12-13 करोड़ पर पहुंच जाएगी और फिर उस स्थिति में हम हर दिन जलापूर्ति करने के लिए और संसाधन जुटा पाएंगे। वर्तमान में राजघाट पर आय के विरुद्ध खर्च चार गुना ज्यादा है।
-अभय दरे, महापौर सागर