सागर

सरकारी स्कूलों से बच्चों का मोहभंग, 10 साल में आधी रह गई दर्ज संख्या, 51 में बीस से कम बच्चे

साल दर साल घट रही दर्ज संख्या, दो स्कूल हुए बंद, एक दर्जन बंद होने की कगार पर, दर्ज संख्या बढ़ाने खर्च हो रहे करोड़ों रुपए, लेकिन स्थिति में नहीं हो पा रहा सुधार
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Jul 06, 2026
Children losing interest in government schools; enrollment halved in 10 years; 51 schools have fewer than twenty students.
इस स्थिति में हैं स्कूल। फोटो-पत्रिका

बीना. विकासखंड में शासकीय प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या लगातार घटती जा रही है। पिछले 10 वर्ष के आंकड़ों के अनुसार दर्ज संख्या आधी रह गई है। हालात यह हैं कि 51 स्कूल ऐसे हैं, जहां 20 से भी कम विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। एक दर्जन स्कूलों में कहीं दो, तो कहीं पांच विद्यार्थी हैं। यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले वर्षों में एक दर्जन से अधिक स्कूलों पर बंद होने का खतरा मंडरा सकता है, जो चिंता का विषय है। वहीं, निजी स्कूलों की दर्ज संख्या बढ़ती जा रही है।
सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या घटने का सबसे बड़ा कारण निजी स्कूलों की बढ़ती संख्या, बेहतर सुविधाओं की चाह, अंग्रेजी माध्यम के प्रति अभिभावकों का बढ़ते रुझान से शासकीय स्कूलों की स्थिति चिंताजनक है। इससे हालात यह बने गए हैं कि वर्ष 2016-17 में कक्षा 1 से 8 तक दर्ज संख्या 18941 थी और वर्ष 2026-27 में यह संख्या घटकर 9477 रह गई है। बीते वर्षों में प्राथमिक स्कूल उमरिया और रसीलपुर स्कूल की दर्ज संख्या शून्य होने से बंद हो चुके हैं। यहां के शिक्षकों को दूसरे स्कूल में भेजा गया है। एक दर्जन स्कूल ऐसे हैं, जो अगले वर्ष तक बंद हो सकते हैं।

51 स्कूलों में 20 से कम विद्यार्थी
शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार विकासखंड के 49 प्राथमिक और 2 माध्यमिक स्कूल ऐसे हैं, जहां विद्यार्थियों की संख्या 20 से कम है। इनमें एक दर्जन स्कूल ऐसे हैं, जिनमें 10 से भी कम बच्चे पढ़ रहे हैं। कहीं दो, तो कहीं सिर्फ 8 बच्चे हैं।

निजी स्कूलों की ओर बढ़ रहा रुझान
पिछले कुछ वर्षों में अभिभावकों का झुकाव निजी स्कूलों की ओर तेजी से बढ़ा है। बेहतर अंग्रेजी शिक्षा, परिवहन सुविधा, नियमित मॉनिटरिंग और आधुनिक संसाधनों के कारण अधिकांश अभिभावक बच्चों का प्रवेश निजी स्कूलों में करा रहे हैं और निजी स्कूलों की संख्या और दर्ज संख्या बढ़ रही है।

करोड़ों रुपए हो रहे खर्च
शासकीय स्कूलों में दर्ज संख्या बढ़ाने के लिए करोड़ों रुपए की योजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिसमें मध्याह्न भोजन, नि:शुल्क गणवेश, पुस्तक, साइकिल आदि सुविधाएं शामिल हैं। इसके बाद भी दर्ज संख्या नहीं बढ़ पा रही है।

किया जा रहा है सर्वे
जिन बच्चों की मेपिंग नहीं हो पा रही है, उनकी तलाश के लिए चाइल्ड ट्रैक सर्वे किया जा रहा है। दर्ज संख्या बढ़ाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
महेन्द्र सिंह, बीआरसीसी, बीना

Updated on:
06 Jul 2026 12:21 pm
Published on:
06 Jul 2026 12:21 pm