ब्रह्माकुमारी संस्थान के मकरोनिया सेवाकेंद्र पर पूर्व मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी दादी प्रकाशमणि की 18 वीं पुण्यतिथि विश्व बंधुत्व दिवस के रूप में मनाई गई।
ब्रह्माकुमारी संस्थान के मकरोनिया सेवाकेंद्र पर पूर्व मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी दादी प्रकाशमणि की 18 वीं पुण्यतिथि विश्व बंधुत्व दिवस के रूप में मनाई गई। सेवाकेंद्र निदेशिका छाया दीदी ने कहा कि ब्रह्माकुमारी के संस्थापक प्रजापिता ब्रह्मा बाबा के अव्यक्त होने के बाद वर्ष 1969 में दादी प्रकाशमणि ने इस ईश्वरीय विश्व विद्यालय की बागडोर संभाली। वर्ष 2007 तक 38 साल मुख्य प्रशासिका के रूप में सेवाओं को विश्व पटल तक पहुंचाया। आपकी दूरदृष्टि, कुशल प्रशासन, स्नेह, विश्व बंधुत्व की भावना और परमात्म शक्ति का ही नतीजा है कि विश्व के 137 से अधिक देशों में भारतीय पुरातन संस्कृति अध्यात्म और राजयोग मेडिटेशन का संदेश पहुंचाया। साथ ही भारत के कोने-कोने में सेवाकेंद्रों की स्थापना की गई। आपके त्याग, लगन और परिश्रम का परिणाम है कि आपके सान्निध्य में ही 40 हजार से अधिक ब्रह्माकुमारी बहनें समर्पित हो चुकी थीं। नीलम दीदी ने कहा कि आपके जीवन के तीन मूलभूत सिद्धांत थे, जिन पर वह आजीवन चलीं। पहला निमित्त भाव, दूसरा निर्माण भाव, तीसरा निर्मल वाणी। दादी कहती थीं- पवित्रता और सादगी ही जीवन का सच्चा शृंगार है। सर्व को आत्मिक प्यार की अंजली देते हुए सदा संतुष्ट रखना है। सदा स्वमान में रह सर्व को सम्मान देना है। इस मौके पर सीता बहन, संध्या बहन, दीपिका बहन, खुशबू बहन, पार्वती बहन, कामिनी बहन सहित बड़ी संख्या में भाई-बहन मौजूद रहे।