सागर

देरी से शुरू हुई ग्रीष्मकालीन मूंग खरीदी, पहले दिन एक केन्द्र पर सिर्फ 8 क्विंटल की खरीद

मंडी में कम दामों पर बिक चुकी है 4400 क्विंटल मूंग, समर्थन मूल्य पर एक एकड़ में खरीदी जा रही 78 किलोग्राम मूंग, किसान कर रहे शत-प्रतिशत मूंग खरीदी की मांग
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Jul 11, 2026
Delayed procurement of summer moong; only 8 quintals purchased at one center on the first day.
फाइल फोटो

बीना. ग्रीष्मकालीन मूंग की समर्थन मूल्य पर खरीदी आखिरकार शुक्रवार से शुरू हो गई है। खरीदी में देरी और बहुत कम मात्रा हो रही खरीद करने से किसानों में नाराजगी है। पहले दिन सिर्फ एक केन्द्र पर 8 क्विंटल मूंग की खरीदी हुई।
15 जून तक समर्थन मूल्य पर मूंग बेचने के लिए पंजीयन हो गए थे, जिसमें बीना क्षेत्र में करीब 1500 किसानों ने पंजीयन कराए हैं। खरीदी जून माह से ही शुरू होनी थी, लेकिन शुक्रवार को बिहरना वेयरहाउस परिसर में सिर्फ एक कंजिया केन्द्र पर खरीदी शुरू हो सकी है। जबकि अभी दो केन्द्र और शुरू होने की बात अधिकारी कह रहे हैं। समर्थन मूल्य पर खरीदी शुरू होने के पहले ही कृषि उपज मंडी में किसान 4400 क्विंटल मूंग कम दामों पर किसान बेच चुके हैं। क्योंकि रुपयों की जरूरत होने पर किसानों को मजबूरी में उपज बेचनी पड़ी। समर्थन मूल्य 8780 रुपए क्विंटल तय किया गया है, जबकि मंडी में 5830 से 6900 रुपए क्विंटल मूंग बिक रही है।

एक एकड़ में सिर्फ 78 किलोग्राम होगी खरीदी
समर्थन मूल्य पर खरीदी में इस वर्ष खरीदी मात्रा भी कम कर दी गई है और एक एकड़ में सिर्फ 78 किलोग्राम मूंग खरीदी जाएगी। किसान कम मात्रा में खरीदी का लगातार विरोध कर रहे हैं और 100 प्रतिशत मूंग खरीदी की मांग कर रहे हैं। क्योंकि ग्रीष्मकालीन मूंग की औसत पैदावार करीब 6 क्विंटल एकड़ है। पूरी खरीदी न होने से किसान कम दामों में मंडी में उपज बेचने होंगे मजबूर।

व्यापारी बेचते हैं उपज
सरकारी खरीदी देरी से शुरू होने का फायदा व्यापारियों को मिलता है, क्योंकि वह किसानों की उपज कम दामों में खरीद लेते हैं और बाद में समर्थन मूल्य पर किसानों के पंजीयन पर मूंग बेच देते हैं। पिछले वर्षों में ऐसे मामले सामने भी आ चुके हैं।

शत-प्रतिशत हो खरीदी
भारतीय किसान जनशक्ति श्रमिक यूनियन के संभागीय अध्यक्ष सीताराम ठाकुर ने कहा कि किसानों की शत-प्रतिशत उपज समर्थन मूल्य पर खरीदी जाए, जिससे उन्हें उचित मूल्य मिल सकें। कम खरीदी होने पर शेष उपज उन्हें मंडी में कम दामों पर बेचनी पड़ेगी। किसान यूनियन द्वारा इस मांग को लेकर लगातार ज्ञापन सौंपे जा रहे हैं।

Updated on:
11 Jul 2026 11:42 am
Published on:
11 Jul 2026 11:42 am