
बीना. सड़कों को गड्ढा मुक्त करने और आम लोगों की शिकायतों का तत्काल निराकरण करने के लिए लोक निर्माण विभाग ने लोकपथ एप की सुविधा शुरू की है, लेकिन यही व्यवस्था अब सवालों के घेरे में है। आरोप है कि एप पर सडक़ के गड्ढों की शिकायत मिलने के बाद कुछ अधिकारी मौके पर वास्तविक काम कराने के बजाय दूसरी सडक़ की तस्वीरें अपलोड कर शिकायतों का निराकरण दिखा रहे हैं। इससे शिकायतकर्ता की समस्या जस की तस बनी हुई है, जबकि विभाग के रिकॉर्ड में शिकायत का निराकरण हो चुका है।
गौरतलब है कि लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने चार दिन पहले अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि सड़क के गड्ढों से संबंधित शिकायतों का चार दिन के अंदर निराकरण किया जाए। इसके बाद शिकायतों के तत्काल निराकरण का दावा, तो किया जा रहा है, लेकिन जमीनी स्थिति पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
यदि शिकायतों के निराकरण के नाम पर गलत तस्वीरें अपलोड की जा रही हैं, तो यह पूरी ऑनलाइन शिकायत व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करता है। विभाग के उच्चाधिकारियों को ऐसी शिकायतों की मौके पर जांच कर यह देखना चाहिए कि एप पर अपलोड की गई तस्वीर उसी स्थान की है या नहीं। साथ ही शिकायत बंद करने से पहले जीपीएस आधारित सत्यापन और मौके की जांच की व्यवस्था भी प्रभावी रूप से लागू किए जाने की जरूरत है।
बीना रिफाइनरी गेट नंबर-1 से कोविड अस्पताल मार्ग होते हुए मुंगावली-कंजिया रोड को जोडऩे वाली सडक़ पर लोकपथ एप के माध्यम से गड्ढों की शिकायत की गई थी। शिकायत का चार दिन में निराकरण भी दर्ज कर दिया गया। शिकायतकर्ता के अनुसार मौके पर गड्ढों की मरम्मत करने के बजाय किसी दूसरी जगह की सीसी रोड के एक हिस्से की तस्वीर अपलोड कर शिकायत बंद कर दी गई। ऐसे में सवाल है कि जब शिकायत वाली सडक़ की मरम्मत ही नहीं हुई है, तो उसका निराकरण किस आधार पर किया गया।
खुरई-राहतगढ़ रोड पर एक व्यक्ति ने सड़क के गड्ढों को लेकर लोकपथ एप पर शिकायत दर्ज की थी। आरोप है कि यहां भी गड्ढे भरने की वास्तविक तस्वीर के बजाय दूसरी जगह की सडक़ की तस्वीर अपलोड कर शिकायत का निराकरण कर दिया गया। शिकायतकर्ता के अनुसार सडक़ की वास्तविक स्थिति में कोई खास बदलाव नहीं हुआ।