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बीना के सिविल अस्पताल में ईसीजी तक की सुविधा नहीं, हृदय रोगियों का इलाज भगवान भरोसे

कार्डियोलॉजिस्ट हैं नहीं, एमडी का पद वर्षों से खाली, बीना क्षेत्र में पांच माह की स्क्रीनिंग के दौरान 3399 मरीज मिले बीपी से पीड़ित, जिसमें 604 गंभीर श्रेणी में हैं मरीज
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Bina's Civil Hospital lacks even basic ECG facilities; cardiac patients are left to the mercy of God.

सिविल अस्पताल। फोटो-पत्रिका

बीना. सिविल अस्पताल में हृदय रोगियों की जांच और उपचार की पर्याप्त व्यवस्था न होने से मरीजों को दूसरे शहरों में जाकर इलाज कराना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि अस्पताल में ईसीजी जैसी प्राथमिक जांच की सुविधा तक उपलब्ध नहीं है। वहीं, मेडिसिन विशेषज्ञ (एमडी) का पद भी कई वर्षों से खाली पड़ा है। ऐसे में सीने में दर्द, सांस लेने में तकलीफ, ब्लड प्रेशर और हृदय संबंधी समस्या लेकर पहुंचने वाले मरीजों को जांच व विशेषज्ञ उपचार के लिए दूसरे शहरों का रुख करना पड़ रहा है।
स्वास्थ्य विभाग की स्क्रीनिंग में भी क्षेत्र में ब्लड प्रेशर से पीडि़त मरीजों की बड़ी संख्या सामने आई है। पिछले पांच माह में 3399 मरीज बीपी की सामने आए हैं, जिनमें 604 मरीज गंभीर श्रेणी के पाए गए हैं। इन मरीजों का निरंतर उपचार और फॉलोअप किया जा रहा है। इतनी बड़ी संख्या में बीपी मरीज सामने आने के बावजूद अस्पताल में हृदय रोगों की जांच के लिए आवश्यक सुविधाओं का अभाव चिंता का विषय है। मेडिसिन विशेषज्ञ का पद लंबे समय से रिक्त है। बीपी, हृदय और अन्य गंभीर बीमारियों से जुड़े मरीजों को विशेषज्ञ चिकित्सकीय परामर्श की आवश्यकता होती है, लेकिन विशेषज्ञ की कमी के कारण मरीजों को रेफर किया जाता है, इससे गरीब और मध्यमवर्गीय मरीजों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।

ईसीजी जांच के लिए भी बाहर जाने की मजबूरी


हृदय संबंधी बीमारी की पहचान में ईसीजी महत्वपूर्ण जांच मानी जाती है। सीने में दर्द या हृदय संबंधी अन्य समस्या होने पर अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को ईसीजी के लिए बाहर जाना पड़ता है। खासकर रात या आपात स्थिति में यह परेशानी और बढ़ जाती है। गंभीर मरीजों के लिए शुरुआती स्तर पर जांच और उपचार में देरी जोखिम बढ़ा देती है।

गंभीर मरीजों के लिए समय पर उपचार जरूरी


हृदय संबंधी बीमारी में शुरुआती जांच और समय पर उपचार बेहद महत्वपूर्ण होता है। अस्पताल में ईसीजी जैसी आवश्यक सुविधा और विशेषज्ञ चिकित्सक उपलब्ध नहीं होने से मरीजों को दूसरे शहरों तक जाना पड़ता है। कई बार गंभीर मरीजों को रेफर करने में लगने वाला समय भी परेशानी बढ़ा देता है।

हर संभव इलाज देने का करते हैं प्रयास


अस्पताल में एमडी न होने से ईसीजी नहीं हो पाती है। यदि कोई हृदय रोगी आता है, तो हर संभव प्राथमिक इलाज कर रेफर किया जाता है। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में मरीजों की स्क्रीनिंग लगातार चल रही है, जिससे समय पर इलाज मिल सके। साथ ही योग, आहार और जीवनशैली आदि का परामर्श दिया जा रहा है।
डॉ. संजीव अग्रवाल, बीएमओ, बीना