
सागर. पथरिया व रमना ईको टूरिज्म पार्क के डवलपमेंट के बाद अब राजघाट के पास भी इन्हीं की तरह ईको टूरिज्म डवलप किया जाएगा। दक्षिण वन मंडल ने इसके लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं। डीपीआर बनाने का काम भी शुरू हो गया है। इस तरह के डवलपमेंट के पीछे वनाधिकारी जंगलों की अवैध कटाई रोकने और वनांचल में रहने वाले लोगों को रोजगार मुहैया कराने की बात कह रहे हैं। अफसरों का कहना है कि टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए खूब स्कोप है। राजघाट क्षेत्र में बांध तो है ही, साथ ही जंगल और पहाडि़यां भी मौजूद हैं। ऐसे में यहां कई एडवेंचर एक्टिविटी हो सकती हैं।
यह है उद्देश्य
अवैध कटाई से वनांचल के लोगों की आजीविका चलती है, लेकिन इससे पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है। इसलिए जहां भी स्कोप है, वहां स्थानीय ग्रामीणों को रोजगार मुहैया कराना है। इससे वनों की सुरक्षा तो होगी ही, साथ ही लोगों को रोजगार मिलेगा और जिले में टूरिज्म को भी।
कार्यशाला हुई
वन, वन्यप्राणी, पर्यावरण सुरक्षा और टूरिज्म को बढ़ावा देने गत दिवस कार्यशाला का आयोजन भी हुआ, इसमें मुख्य वन संरक्षक विकास कुमार वर्मा रहे। इस कार्यशाला में दक्षिण वन मंडल के डीएफओ क्षितिज कुमार से लेकर जमीनी स्तर के अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे।
स्टेस्ट प्लानिंग कमीशन के समक्ष रखा था प्रस्ताव
राजघाट क्षेत्र में ईको टूरिज्म डवलप करने के लिए वन विभाग ने हाल ही में स्टेट प्लानिंग कमीशन की टीम के समक्ष प्रस्ताव रखा गया था। कमीशन के उपाध्यक्ष चैतन्य कार्तिक मौजूदगी में हुई इस बैठक में वरिष्ठ अफसरों ने स्थानीय अधिकारियों के प्रोजेक्ट को स्वीकृति दे दी है।
रमना में बढ़ाएंगे वाटर स्पोट्र्स, नहीं जलेगा गैस चूल्हा
रमना में सुनार नदी पास से बहती है, इसलिए यहां वाटर स्पोर्टिंग शुरू करने का प्लान है। इसके लिए स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा। फिलहाल रमना के संचालन की जिम्मेदार चार-चार महिलाओं के साथ 20-22 युवाओं की समिति बनाकर किया जा रहा है। इधर, रमना फॉरेस्ट में विभाग अभी एक दर्जन एडवेंचर एक्टिविटी शुरू कर चुका है। इसमें सबसे खास तथ्य यह है कि रमना में गैस सिलेंडर का उपयोग नहीं किया जाएगा। यहां पर यहां विभाग ने एक खास तरह का चूल्हा तैयार कराया है। इसमें लकडि़यों के स्थान पर पत्तों का इस्तेमाल किया जाएगा और इसी पर खाना पकेगा।
पथरिया, रमना को टूरिस्ट मैप पर लाना है। लोगों को जोड़कर टूरिज्म को बढ़ावा देने का उद्देश्य है। विभाग का अगला लक्ष्य राजघाट से लगा वन क्षेत्र है। स्टेट प्लानिंग कमीशन की बैठक में इसे स्वीकृति मिल गई है।
-क्षितिज कुमार, डीएफओ, दक्षिण वन मंडल