श्री देव गोपाल लाल मंदिर में भक्ति और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला, जब मंदिर की स्थापना की 61वीं वर्षगांठ वृंदावन शैली के ब्रज उत्सव के रूप में धूमधाम से मनाई गई। यह पावन अवसर कान्हा के प्रति समर्पित गृहस्थ संत राम यादव काकाजी द्वारा 1965 में रखी गई नींव की याद दिलाता […]
श्री देव गोपाल लाल मंदिर में भक्ति और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला, जब मंदिर की स्थापना की 61वीं वर्षगांठ वृंदावन शैली के ब्रज उत्सव के रूप में धूमधाम से मनाई गई। यह पावन अवसर कान्हा के प्रति समर्पित गृहस्थ संत राम यादव काकाजी द्वारा 1965 में रखी गई नींव की याद दिलाता है, जहां हर वर्ष भक्त हजारों की संख्या में जुटकर राधा-कृष्ण की लीला का आनंद लेते हैं। इन्होंने ही 1965 में मंदिर की नींव रखी, तब से यह स्थान भक्ति का केंद्र बन चुका है। हर साल वृंदावन की तर्ज पर उत्सव आयोजित होता है। वृंदावन से आए कलाकारों ने लगभग 15 क्विंटल फूलों से आकर्षक फूल बंगला सजाया।
अष्ट सखी झांकियां एवं कृष्ण-राधा की जीवंत झांकी ने भक्तों का मन मोह लिया। राधारमन दास महाराज (दंडी स्वामी) ने अष्ट सखियों का पूजन किया। भक्तों ने उन्हें गोद में उठाकर नृत्य किया, जिससे वातावरण राधे-राधे के जयकारों से गूंज उठा। राधे-राधे कीर्तन मंडल के गोपाल कृष्ण बंधु कृष्ण हरी और मनु यादव ने 'इशारों बुलाई गई रे… बरसाने की छोरी' से कार्यक्रम की शुरुआत की। गोधूलि बेला से आरंभ हुआ यह भक्ति संगीतमय महोत्सव आधी रात तक जारी रहा। भक्तों के कदम थिरकते रहे, हर कोई कृष्ण भक्ति में डूबा नजर आया। रात 12 बजे बांके बिहारी सरकार की आरती के साथ उत्सव का समापन हुआ।
मंदिर की पोशाक एवं अन्नकूट सेवा केशवगंज वार्ड निवासी योगेश गुप्ता एवं उनके पुत्र प्रशांत गुप्ता ने भेंट की। परिसर में ही कान्हा का दूसरा मंदिर निर्माणाधीन है। इसकी नींव 9 मई 2025 को रखी गई। राम यादव ने अपना 1800 वर्ग फीट प्लॉट दान में दिया। कुल 8000 वर्ग फीट क्षेत्र में बन रहे इस मंदिर के लिए 40 लाख रुपए के डोम की घोषणा विधायक शैलेंद्र जैन ने की। 55 वर्ष पहले काका द्वारा शुरू की गई प्रभातफेरी आज उनके पुत्रों के राधे-राधे संकीर्तन मंडल ने पहचान बनाई है।