
महिला आरक्षण विधेयक का संसद में विरोध करने वाले कांग्रेस समेत विपक्ष के खिलाफ सागर नगर निगम के विशेष सम्मेलन में निंदा प्रस्ताव पास किया। इस सम्मेलन का पहले ही कांग्रेसी पार्षदों ने बहिष्कार किया था। वहीं भाजपा की भी 22 महिला पार्षदों में से सिर्फ 9 ही सम्मेलन में मौजूद रहीं। निंदा प्रस्ताव रखने और उसके पास होने में 10 मिनट का समय लगा। इसके साथ ही सम्मेलन समाप्त हो गया।
शासन के निर्देश पर सरकार के नारी वंदन अभियान को लेकर विशेष सम्मेलन बुलाया गया था। इस बीच संसद में सरकार द्वारा लाए महिला आरक्षण विधेयक पर्याप्त वोट नहीं मिलने से पारित नहीं हो सका। यही वजह रही कि रविवार को नगर निगम के विशेष सम्मेलन में विपक्ष के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाया गया। सम्मेलन 30 मिनट के विलंब से दोपहर डेढ़ बजे शुरू हुआ और निंदा प्रस्ताव पास होते ही 1.40 बजे समाप्त हो गया।
सागर निगम में महिला पार्षदों की संख्या 27 है। इनमें से कांग्रेस की 5 पार्षद हैं जो सम्मेलन के बहिष्कार की वजह से अनुपिस्थत थीं। भाजपा की 22 महिला पार्षदों में से भी केवल 9 मौजूद रहीं। महिला प्रकोष्ठ की प्रदेश उपाध्यक्ष याकृति जडिय़ा से लेकर वरिष्ठ पार्षद आशारानी जैन सहित 13 महिला पार्षद नहीं आईं।
निगमाध्यक्ष वृंदावन अहिरवार ने सभी भाजपा पार्षदों से कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम के माध्यम से महिला सशक्तिकरण के लिए लोकसभा एवं विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए संसद में बिल पेश किया था, जिसका विपक्षी दलों ने विरोध किया। चर्चा उपरांत निर्णय लिया गया कि नगर निगम नारी वंदन अधिनियम के समर्थन का प्रस्ताव पारित करता है और विपक्षी दलों ने विरोध करने पर निंदा प्रस्ताव पारित कर शासन को भेजा जाए। इस दौरान परिषद में डॉ. भीमराव आंबेडकर के चित्र पर माल्यार्पण कर पुष्पांजलि अर्पित की गई।
सम्मेलन के दौरान निंदा प्रस्ताव पर पार्षदों को बोलने का अवसर दिया गया। इसमें पार्षद रेखा यादव, आयुषी चौरसिया, मेघा दुबे ने कांग्रेस समेत विपक्ष की निंदा करते हुए कहा कि बिल महिलाओं को बराबरी का हक देता, लेकिन विपक्ष ऐसा नहीं करना चाहता। विरोध करने वाले महिलाओं को पीछे रखना चाहते हैं। इनके अलावा पार्षद धमेंद्र खटीक ने कहा विधेयक पास होने से लोकसभा, विधानसभा में महिला सदस्यों की संख्या बढ़ती, देश-प्रदेश के विकास में भागीदार बनतीं। पार्षद देवेंद्र अहिरवार ने कहा कि सम्मेलन का बहिष्कार कर कांग्रेस ने साबित किया कि महिला कल्याण के प्रति वे संवेदनशील नही हैं।
महापौर ने कहा कि संसद में भले 54 वोट कम पड़े और संशोधन बिल पास न हो पाया हो लेकिन मैं प्रधानमंत्री को धन्यवाद देती हूं, कि उन्होने 2023 में ही नारी शक्ति अधिनियम पास कराकर कानून बना दिया। 17 अप्रेल वाला संशोधन तो सिर्फ 2029 में लागू कराने के लिए था। हमें उम्मीद है कि प्रधानमंत्री पुन: कोशिश करेंगे और 2029 के पहिले बहनों को उनका हक मिलेगा।
निगम के नेता प्रतिपक्ष बाबू सिंह यादव ने कहा, भाजपा महिलाओं के आरक्षण की बात करती है, लेकिन जब टिकट की बारी आती है तो नेताओं की पत्नियों को टिकट दे दिया जाता है। आम महिलाओं का हक छीनकर भाजपा नेता अपने ही घर की महिलाओं का लाभ पहुंचाते हैं। इसका उदाहरण, निगम व जनपद, जिला पंचायत में देखा जा सकता है, इसलिए हम निगम के विशेष सम्मेलन में नहीं गए।
Published on:
19 Apr 2026 05:04 pm
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