बड़ी परेशानी योजनाकारों द्वारा बनाई गई अजीबो-गरीब गाइडलाइन और नियम हैं।
सागर. प्रधानमंत्री सौभाग्य योजना की अभी शुरुआत भी ढंग से नहीं हो पाई है और पेंच उलझने लगे हैं। बड़ी परेशानी योजनाकारों द्वारा बनाई गई अजीबो-गरीब गाइडलाइन और नियम हैं। इन पर ध्यान दिया जाए तो शासन का उद्देश्य हर घर तक बिजली पहुंचाना नहीं, बल्कि एक घर में ३-४ कनेक्शन देकर एक उपलब्धि बताना मात्र है। क्योंकि जिन घरों को बिजलीविहीन बताया जा रहा है, उनमें पहले से कनेक्शन हैं।
ऐसे समझें पूरा खेल
योजना में शासन स्तर पर जो बिजलीविहीन परिवारों की सूची तैयार की गई है, वह मकान/घर के अनुसार न होकर समग्र आईडी के नियमों पर आधारित है। मतलब यदि एक घर में मां-बाप और अविवाहित बच्चा है तो वह एक परिवार गिना जाएगा। इसी घर में दो और भाई हैं, जिनकी शादी हो चुकी है तो सरकार उन्हें अलग परिवार चिह्नित करेगी। इस हिसाब से एक घर में तीन परिवार हो गए। जबकि हकीकत में घर में एक ही परिवार के सात लोग निवास कर रहे हैं।
ऐसे उलझ रही है योजना
सवाल: दो-चार घर बस्ती से
दूर हैं तो क्या होगा?
जवाब: चूंकि हर घर में कनेक्शन देना है, इसलिए योजना का
लाभ दिया जाएगा, लेकिन
व्यय देखा जाएगा।
सवाल: खेतों में मकान बनाकर रहने लगे तो कैसे कनेक्शन देंगे।
जवाब: यहां संभव नहीं है,
वहां कृषि फीडर का ही
उपयोग करना होगा।
सवाल: चूंकि योजना में घुम्मकड़ समुदाय को शामिल किया गया है तो दस्तावेज क्या मान्य होंगे।
जवाब: यदि स्थानीय दस्तावेज हैं, तो ही कनेक्शन दिया जाएगा।
सवाल: जो लक्ष्य है उसकी
पूर्ति संभव है क्या।
जवाब: लक्ष्य पूरा करना कठिन है।
सवाल: यदि चिह्नित परिवार ने कनेक्शन लेने से इनकार किया
तो क्या प्रावधान है।
जवाब: मना किया तो जानकारी ऊपर अपडेट करनी है, अभी
कोई प्रावधान नहीं है।
सवाल: कोई अपने घर से दूर शहर में किराए से रहता है और
सूची में नाम है तो।
जवाब: यदि उसका मकान है
तो कनेक्शन देना होगा।
जवाब एक्सपर्ट के अनुसार, यही अनसुलझे सवाल बिजली कंपनी के लिए व्यवहारिक समस्याएं हैं।
एक्सपर्ट व्यू
योजना में कुछ खास नहीं है। सरकार ने देशभर में चार करोड़ से ज्यादा परिवारों को योजना के लिए चिह्नित किया है, जो किसी भी स्थिति में संभव ही नहीं है। यदि स्थानीय स्तर की बात की जाए तो केवल सागर जिले में सवा लाख से ज्यादा परिवारों को बिजलीविहीन बताया गया है, जबकि जमीनी स्तर पर देखा जाए तो १० हजार मिलना भी मुश्किल हैं। इस योजना की गाइडलाइन और नियमों को देखकर यह स्पष्ट है कि सरकार नंबर बढ़ाने और एक ज्यादा से ज्यादा बिजली कनेक्शन देकर उपलब्धि अपने नाम करना चाहती है। इतना ही नहीं यह भी अभी से तय है कि योजना के तहत भले ही हर घर तक बिजली पहुंचाने का लक्ष्य है, लेकिन जो सवा लाख का लक्ष्य दिया है उसमें से मार्च
२०१९ तक आधे कनेक्शन होना
भी संभव नहीं है।
(एक्सपर्ट बिजली कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी हैं)