सागर

गुप्त नवरात्रि शुरू, शुभ मुहूर्त में महाकाली की हुई घटस्थापना, 10 महाविद्याओं की होगी साधना

माघ माह के शुक्ल पक्ष की गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ सोमवार को हुआ। शहर के विभिन्न देवी मंदिरों में माता की विशेष पूजा-अर्चना के साथ ही 10 महाविद्याओं की साधना की होगी। महाकाली मंदिर, बाघराज मंदिर, मां सिंहवाहिनी मंदिर परकोटा, सिंहवाहिनी मंदिर विजय टॉकीज सहित अन्य मंदिरों में भी 9 दिनों तक 10 महाविद्याओं का […]

2 min read
Jan 20, 2026

माघ माह के शुक्ल पक्ष की गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ सोमवार को हुआ। शहर के विभिन्न देवी मंदिरों में माता की विशेष पूजा-अर्चना के साथ ही 10 महाविद्याओं की साधना की होगी। महाकाली मंदिर, बाघराज मंदिर, मां सिंहवाहिनी मंदिर परकोटा, सिंहवाहिनी मंदिर विजय टॉकीज सहित अन्य मंदिरों में भी 9 दिनों तक 10 महाविद्याओं का हवन-पूजन के साथ मां को प्रसन्न करने के लिए दुर्गा सप्तशती पाठ शुरू हो गया। बाघराज मंदिर में प्रतिदिन माता रानी को दुर्गा सप्तशती का पाठ सुनाया जाएगा। पुजारी पुष्पेंद्र महाराज ने बताया कि पहले दिन अखंड ज्योत जलाकर घटस्थापना की गई। माता रानी का नई पोशाक से श्रृंगार हुआ। प्रतिदिन दुर्गा सप्तशती के पाठ के बाद हवन किया जाएगा।

महाकाली मंदिर में बीज मंत्रों से हवन चलेगा

महाकाली मंदिर चमेली चौक में मौनी अमावस्या पर रात 12 बजे घटस्थापना कर मां महाकाली की महाआरती की गई। पंडित संजय अवस्थी ने बताया कि घटस्थापना के पूर्व मां महाकाली का षोडोषोपचार पूजन कर अभिषेक किया गया। नए वस्त्रों से मां का श्रृंगार कर 10 महाविद्याओं का आह्वान पूजन कर घटस्थापना की गई। इसके बाद रात्रि 1 बजे 51 दीपों से मां की महाआरती की गई। प्रतिदिन महाविद्या का पूजन चलेगा। सुबह 8 बजे मंगला आरती के बाद दुर्गा सप्तशती का पाठ होगा। सुबह 11 बजे दुर्गा सप्तशती के बीज मंत्रों से हवन कराया जाएगा। शाम को महाकाली महिला मंडल द्वारा माता रानी के भजन होगे। पंचमी पर मां सरस्वती का पूजन कर महाआरती की जाएगी। वहीं 16 फरवरी को मां नर्मदा जयंती पर सुबह मां नर्मदाष्टक का पाठ होगा। दोपहर में मां नर्मदा जी की महाआरती की जाएगी। साथ ही विशाल चुनरी यात्रा निकाली जाएगी।

साल में होती हैं चार नवरात्रि

पं. रघु शास्त्री ने बताया कि साल में चार नवरात्रि आती हैं। चैत्र और शारदीय नवरात्रि को प्रकट नवरात्रि कहते हैं। इन नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है, व्रत रखते हैं और इन्हें एक उत्सव की तरह मनाया जाता है। जबकि, माघ और आषाढ़ महीने की नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहते हैं। गुप्त नवरात्रि खासतौर पर तंत्र-मंत्र से जुड़े साधक के लिए होती है, इन दिनों में तंत्र साधना और आत्मिक शक्ति को जाग्रत करने के लिए तप किया जाता है।

दस महाविद्याएं इस प्रकार हैं

काली : समय और मृत्यु की देवी मानी जाती हैं।
तारा : करुणा और ज्ञान की देवी हैं।
त्रिपुर सुंदरी : प्रेम, सुंदरता और आध्यात्म की देवी हैं।
भुवनेश्वरी : पूरे संसार की अधिष्ठात्री देवी हैं।
छिन्नमस्ता : त्याग और बलिदान का प्रतीक हैं।
भैरवी : तपस्या और कठिन साधना की देवी हैं।
धूमावती : त्याग, वैराग्य और जीवन के कठोर सत्य की देवी हैं।
बगलामुखी : शत्रुओं और नकारात्मक शक्तियों पर विजय दिलाने वाली देवी हैं।
मातंगी : विद्या, कला और संगीत की देवी मानी जाती हैं।
कमला : धन, सुख और समृद्धि की देवी हैं।

Updated on:
20 Jan 2026 05:04 pm
Published on:
20 Jan 2026 05:03 pm
Also Read
View All

अगली खबर