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खेजरा धाम के महाकाल मंदिर में सुबह 4 बजे से रात 12 बजे तक मिलेंगे भक्तों को दर्शन, वैदिक रीति रिवाज से होगा भगवान का विवाह

बुंदेलखंड में महाकाल मंदिर नेशनल हाईवे 44 पर बांदरी कस्बे के पास खेजरा धाम में महाकाल मंदिर की प्रतिकृति तैयार की गई है। यहां महाशिवरात्रि पर्व का आयोजन होगा, जिसे नव शिवरात्रि नाम दिया गया है। 15 फरवरी को महाशिवरात्रि का पर्व मनेगा। भगवान के विवाह के सभी संस्कार वैदिक रीति रिवाज के साथ कराए […]

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सागर

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Rizwan ansari

Feb 13, 2026

बुंदेलखंड में महाकाल मंदिर नेशनल हाईवे 44 पर बांदरी कस्बे के पास खेजरा धाम में महाकाल मंदिर की प्रतिकृति तैयार की गई है। यहां महाशिवरात्रि पर्व का आयोजन होगा, जिसे नव शिवरात्रि नाम दिया गया है। 15 फरवरी को महाशिवरात्रि का पर्व मनेगा। भगवान के विवाह के सभी संस्कार वैदिक रीति रिवाज के साथ कराए जाएंगे। खेजरा धाम मंदिर महाशिवरात्रि पर सुबह 4 बजे से भक्तों को दर्शन के लिए रात 12 बजे से खुला रखा जाएगा। मंदिर में महाकाल मंदिर की तरह प्रवेश द्वार बनाया गया है गर्भ गृह में महाकाल मंदिर की तरह वास्तु रखा गया है इसके अलावा गर्भगृह में भगवान महाकाल के साथ-सथ मां गौरी, प्रथम पूज्य गणेश और भगवान कार्तिकेय भी स्थापित किए गए हैं।

पहली बार मंदिर में महाशिवरात्रि का आयोजन

इस मंदिर की खास बात ये है कि मंदिर का निर्माण कार्य सिर्फ पुष्य नक्षत्र में किया जाता है बाकी 27 दिन मंदिर के निर्माण कार्य की तैयारियां चलती रहती हैं। अब तक 108 पुष्य नक्षत्र में मंदिर का निर्माण किया गया है। पहली बार मंदिर में महाशिवरात्रि का आयोजन हो रहा है। भगवान महाकाल मंदिर की प्रतिकृति तैयार करने की तपस्या पं. महेश तिवारी ने की है। उन्हें विरासत में धर्म और अध्यात्म की शिक्षा मिली है। उन्होंने तीन विषयों से एमए करने के बाद समाजशास्त्र में पीएचडी की, कई सरकारी नौकरी करने के बाद भी उनका मन नहीं लगा और सब कुछ छोड़कर अपने गांव वापस आ गए और महाकाल की सेवा में जुट गए। उज्जैन में भगवान महाकाल के दरबार में सालों समय बिताने के बाद उनके मन में विचार आया कि क्यों न अपने गांव में महाकाल मंदिर की तर्ज पर ही मंदिर का निर्माण कराया जाए और फिर उन्होंने 2015 में मंदिर निर्माण का काम शुरू किया।

महाकाल मंदिर की तर्ज पर निर्माण

खेजरा के महाकाल धाम में शिवलिंग, प्रवेश-निकास, दिशा और आकृति महाकाल मंदिर की तर्ज पर किया गया है. जिस तरह उज्जैन मंदिर में प्रवेश के लिए गुफानुमा रास्ते और दक्षिण दिशा से जाना पड़ता है, वैसे भी यहां प्रवेश के लिए तैयार किया गया है। महाकाल मंदिर की तरह खेजरा धाम में भी रूद्र सागर तालाब का निर्माण किया जा रहा है। मंदिर की संरचना और आकृति भी महाकाल मंदिर की तरह है, मंदिर का प्रवेश द्वार भी महाकाल मंदिर की तरह बनाया गया है और गर्भ गृह भी वैसा ही बनाया गया है। मंदिर के बाहर की नक्काशी भी महाकाल मंदिर की तरह है अभी तक 52 फीट ऊंचा मंदिर बन चुका है, उज्जैन महाकाल की तरह मंदिर के ऊपर नागचंद्रेश्वर मंदिर भी बनेगा, जिसके साल में एक बार नाग पंचमी पर दर्शन होंगे।

रामराजा सरकार और कृष्ण दरबार के भी दर्शन

महाकाल धाम खेजरा के मंदिर परिसर में सिर्फ बाबा महाकाल के दर्शन नहीं होंगे बल्कि रामराजा सरकार और भगवान राधा-कृष्ण का दरबार भी यहां बनाया जा रहा है। मंदिर के बाई तरफ श्री राधाकृष्ण दरबार और दाईं तरफ रामराजा सरकार की स्थापना की गई है। इसके अलावा मंदिर परिसर में ही यज्ञशाला का निर्माण किया गया है। महाकाल मंदिर की तर्ज पर महाकाल उपवन भी लगाया गया है ।