सागर

सज्जन लोगों को सारा जगत सज्जन नजर आता है : निर्यापक मुनि सुधा सागर

महान लोग वो होते हैं जो महान गुणों को धारण करते हैं। जिन्हें दुनिया के हर जीव में महानता दिखती है। ऐसे ही सज्जन आदमी भी होते हैं जो दुर्जनता से रहित होते हैं, लेकिन कुछ सज्जन ऐसे होते हैं जिनकी दृष्टि में स्वयं तो दुर्जन नजर आता है और सारा जगत सज्जन नजर आता है।

less than 1 minute read
Sep 28, 2024
निर्यापक मुनि सुधा सागर

भाग्योदय तीर्थ में धर्मसभा का आयोजन

सागर. महान लोग वो होते हैं जो महान गुणों को धारण करते हैं। जिन्हें दुनिया के हर जीव में महानता दिखती है। ऐसे ही सज्जन आदमी भी होते हैं जो दुर्जनता से रहित होते हैं, लेकिन कुछ सज्जन ऐसे होते हैं जिनकी दृष्टि में स्वयं तो दुर्जन नजर आता है और सारा जगत सज्जन नजर आता है। यह बात निर्यापक मुनि सुधा सागर महाराज ने भाग्योदय तीर्थ में आयोजित धर्मसभा में कही। मुनि ने कहा कि स्वयं गुणवान होकर गुणहीन की अनुभूति, ऐसे लोग तीर्थंकर भगवान बनने का अधिकार रखते हैं। स्वयं के लिए तो दुनिया कमाती है, कभी दूसरों के लिए कमाए, वो व्यक्ति महान में भी महान है। हम अभाव का उतना ही अनुभव करें जितना हम पा सकते हैं, ज्यादा अभाव का अनुभव करने से वर्तमान का सुख खत्म हो जाता है।
मुनि ने कहा कि जैसे दर्पण मैं देखने वाला कहता है कि जरा दर्पण देख लूं। सत्य यह नहीं है कि वह दर्पण नहीं देख रहा है, दर्पण में अपना चेहरा देख रहा है। मुनि ने कहा कि जिस धर्म की क्रिया करने में थकान महसूस हो, विराम का भाव आए बस अब बहुत हो गया, समझ लेना वह धर्म हुआ ही नहीं। किसी भी धर्म की क्रिया चाहे पूजा हो, दान हो, प्रवचन हो, आपका व्रत हो, रात्रि भोजन का त्याग हो, दूसरों के ऊपर उपकार हो, इन सब में थकान आने लगे, समझना तुमने धर्म किया ही नहीं है। धर्म कार्य के बाद तुम थके हुए नजर आते हो, क्योंकि तुमने सब कुछ धर्म के लिए किया है और धर्म तुमसे भिन्न है, धर्म तो भगवानों का है, धर्म तो गुरु का है।

Published on:
28 Sept 2024 05:12 pm
Also Read
View All

अगली खबर