
हिरण्यकश्यप का वध का मंच करते हुए कलाकार
बीना. मध्यप्रदेश शासन संस्कृति विभाग और जिला प्रशासन के सहयोग से ऐरण में तीन दिवसीय ऐरण महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। गुरुवार को महोत्सव के दूसरे दिन उप मुख्यमंत्री व प्रभारी मंत्री राजेन्द्र शुक्ल शामिल हुए और उन्होंने ऐरण के इतिहास के बारे में जाना। इसके बाद बीना नदी पर गंगा आरती की और फिर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ।
उप मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि ऐरण गुप्तकाल के इतिहास को समेटे हुए है। विष्णु भगवान, बराह की मूर्ति देखकर लगता है कि सैकड़ों वर्ष पूर्व भी यहां के कलाकार कितने कुशल और दक्ष होंगे, जिन्होंने इतनी अच्छी नक्काशी की है। उन्होंने कहा कि इतिहास, परंपरा को आधुनिकता से जोडऩे का कार्य ऐरण महोत्सव करेगा। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में लगातार ऐतिहासिक स्थलों पर महोत्सव आयोजित कर उनकी गरिमा एवं पर्यटन को बढ़ाने का कार्य किया जा रहा है। ऐरण में 1700 वर्ष पुरानी प्रतिमाएं हैं और यहां आगे का रोड मेप तैयार किया जा रहा है। महोत्सव से कला संस्कृति को जहां मंच मिल रहा है, वहीं संस्कृति एवं इतिहास से सभी अवगत भी हो रहे हैं। ऐरण विश्व पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होगा, जिससे युवाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे और क्षेत्र समृद्ध बनेगा, विरासत से विकास की उड़ान भी शुरू होगी। भाजपा जिलाध्यक्ष श्याम तिवारी ने कहा कि भाजपा सरकार ऐतिहासिक धरोहर को देश और विश्व में पहचान दिला रही है। ऐरण से बच्चों को भी इतिहास की जानकारी मिलेगी। विधायक निर्मला सप्रे ने कहा कि सरकार के कैलेंडर में ऐरण को शामिल किया गया है। ऐरण विश्व की धरोहर है, बुंदेलखंड का द्वार है और संस्कृतिविभाग में शामिल होने के बाद विकास शुरू हो गया है। इस अवसर पर नगर निगम अध्यक्ष वृंदावन अहिरवार, पूर्व जिलाध्यक्ष गौरव सिरोठिया, पूर्व विधायक अरुणोदय चौबे, अपर कलेक्टर अविनाश रावत, एसडीएम विजय डेहरिया, तहसीलदार अंबर पंथी आदि उपस्थित थे।
इतिहास को विस्तार से जाना
प्रभारी मंत्री ने ऐरण में मौजूद प्राचीन प्रतिमाओं को देखा और ऐरण पर शोध करने वाले डॉ. मोहनलाल चढ़ार ने इतिहास के बारे में जानकारी दी। 48 फीट ऊंचे गरुड़ स्तंभ, नरसिंह भगवान की प्रतिमा, विष्णु भगवान की प्रतिमा और बराह प्रतिमा की जानकारी दी। डॉ. चढ़ार ने बताया कि ऐरण मानव का विकास, भारतीय संस्कृति की झलक मिलती है। यहां सिक्कों की टकसाल थी और सिक्का भी मिलते हैं। कार्यक्रम के दौरान डॉ. हरीसिंह गौर विवि सागर के डॉ. नागेश दुबे और डॉ. मोहनलाल चढ़ार का सम्मान किया गया।
नृत्य नाटिका की दी मनमोहक प्रस्तुति
सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत भजन गायक दशरथलाल परोची गुना ने गणेश वंदना के साथ किया। इसके बाद नवधा कथकालम भोपाल की टीम ने नृत्य नाटिका प्रस्तुत की, जिसमें सूर्य वंदना, नरङ्क्षसह भगवान द्वारा हिरण्यकश्यप के वध का मंचन किया। कलाकारों की प्रस्तुति ने दर्शकों का मनमोह लिया। छतरपुर से आईं नीलम तिवारी और उनके साथियों ने लोक गायन की प्रस्तुति दी। परमानंद केवट सिरोंज ने ढिमराई नृत्य की प्रस्तुति दी। इसके बाद जित्तू खरे और उनके साथियों ने राई नृत्य की प्रस्तुति दी, जो दे रात तक चला। कार्यक्रम देखने बड़ी संख्या में दर्शक पहुंचे।
Updated on:
16 Jan 2026 12:03 pm
Published on:
16 Jan 2026 12:02 pm
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