जिला अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में भर्ती 2 नवजात को मशीनें बंद होने से पीआइसीयू वार्ड में भर्ती किया। इस दौरान प्रसूता वार्ड, आईसीयू, पीआइसीयू व वार्ड नंबर-3 में ही रोशनी रही, बाकी पूरे परिसर में अंधेरा पसरा रहा।
जिला अस्पताल और बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में शनिवार शाम करीब 5.30 बजे से गुल हुई बिजली देर रात 12 बजे तक नहीं आई। बीएमसी में तो जनरेटर के भरासे अस्पताल की व्यवस्था चलती रहीं, लेकिन जिला अस्पताल में मरीजों की जान हलक में आ गई। जिला अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में भर्ती 2 नवजात को मशीनें बंद होने से पीआइसीयू वार्ड में भर्ती किया। इस दौरान प्रसूता वार्ड, आईसीयू, पीआइसीयू व वार्ड नंबर-3 में ही रोशनी रही, बाकी पूरे परिसर में अंधेरा पसरा रहा। बिजली न होने से जिला अस्पताल के अधिकारी-कर्मचारी परिसर में बने रहे, कैजुअल्टी के नए मरीज भी बीएमसी व अन्य अस्पताल पहुंचे। देर रात तक जिला अस्पताल परिसर व बीएमसी कैंपस में भी में अंधेरा छाया रहा। वहीं बिजली विभाग के अधिकारी बस स्टैंड से तिलि तिराहे तक पूरे खंभों पर जांच करते रहे।
बताया गया कि साईंखेड़ा से आई 33 केवी की बिजली लाइन में खराबी के चलते एक फेस बंद था, जिससे जिला अस्पताल और बीएमसी परिसर की बिजली बंद हो गई। जब देर शाम तक बिजली नहीं आई तो मरीजों को चिंता होने लगी, अधिकारी भी जनरेटर की व्यवस्था में लग गए। बीएमसी में पर्याप्त जनरेटर व्यवस्था से यहां अस्पताल में कोई फर्क नहीं आया, लेकिन गल्र्स-बॉयज हॉस्टल में बिजली गुल रही।
जिला अस्पताल में परिजन बच्चों को अस्पताल से बाहर ले आए, जहां डॉक्टर्स ने उनकी व्यवस्था कराई। एसएनसीयू में बैकअप की कोई व्यवस्था नहीं थी, इनवर्टर का बैकअप जब तक रहा एसएनसीयू की मशीनें चलती रहीं। बैकअप खत्म होने के बाद वार्ड में अंधेरा छा गया। अस्पताल प्रबंधन ने बिजली कंपनी से शिकायत की, लेकिन घंटों बाद भी बिजली सप्लाई चालू नहीं हो सकी।
जिला अस्पताल में एक फेस बंद था, तीन बार टीम पहुंचाकर जांच कराई लेकिन फॉल्ट नहीं मिला, इसका पता करने टीमें लगी हुई हैं।
अशोक सोलंकी, मेंटेनेंस प्रभारी शहर
एसएनसीयू वार्ड से 9 बजे 2 बच्चों को पीआइसीयू वार्ड में शिफ्ट किया गया है, अभी पीआइसीयू में और भी बेड खाली हैं। आइसीयू में जनरेटर से व्यवस्था की गई है।
डॉ. अभिषेक ठाकुर, आरएमओ
अस्पताल में कुछ जगह की लाइट बंद है, जनरेटर से व्यवस्था की गई है। शाम करीब 6 बजे से बिजली की समस्या है।
डॉ. आरएस जयंत, सिविल सर्जन