46 दिन में इंसाफ, सात वर्षीय मासूम से दुष्कर्म, त्वरित न्याय का ऐतिहासिक दिन, नौ दिन में कोर्ट कार्रवाई पूरी
रहली (सागर). सात वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म के मामले में प्रथम अपर सत्र विशेष न्यायाधीश सुधांशु सक्सेना की अदालत ने दोषी को फांसी की सजा सुनाई है। कोर्ट ने महज नौ दिन में मामले की प्रक्रिया पूरी की। 21 मई को रहली की एक बच्ची से नमकीन का लालच देकर धर्मस्थल में दुष्कर्म किया था। फरार भग्गी उर्फ भागीरथ काछी को पुलिस ने अगले ही दिन गिरफ्तार कर लिया। यह प्रकरण 26 जून को कोर्ट में आया। 28 जून को चार्ज लगाए गए। 29 को गवाही हुई। चार दिन में 25 गवाहों के बयान हुए। 7 जुलाई को फैसला सुना दिया गया। इससे पहले इंदौर में फांसी की सजा सुनाई गई।
परिवार एवं समाज के साथ हमारे राष्ट्र की धरोहर के रूप में बेटियों को स्थान दिया गया है। अवयस्क बालिकाओं के साथ हो रही पाश्विक घटनाएं बालिकाओं के मानसिक असुरक्षा एवं वेदना का मुख्य कारण बनती जा रही हैं। निश्चित ही उक्त पाश्विक
घटनाएं किसी भी सभ्य समाज में किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं की जा सकतीं।
यदि अबोध बालिका के साथ किए गए क्रूर पाश्विक कृत्य के लिए कठोरतम दंड से दंडित नहीं किया गया तो यह हमारी भारतीय सामाजिक एवं पारिवारिक धरोहर बेटियों के साथ न्याय नहीं होगा।
फैसले में रामायण की चौपाई का भी उल्लेख
अनुज वधु भगिनी सुत नारी। सुनु सठ कन्या सम ए चारी।
इन्हहिं कुदृष्टि बिलोकइ जोई। ताहि बधें कछु पाप न होई।।
अर्थात्- (श्री रामजी ने कहा-) हे मूर्ख! सुन, छोटे भाई की स्त्री, बहिन, पुत्र की स्त्री और कन्या- ये चारों समान हैं। इनको जो कोई बुरी दृष्टि से देखता है, उसे मारने में कुछ भी पाप नहीं होता।। वहीं,कटनी- 5 साल की बच्ची से की अश्लील हरकत-बच्चों को स्कूल ले जाने के लिए लगाए गए ऑटो के चालक ने ५ साल की बच्ची से अश्लील हरकत की। ४ जुलाई को बच्ची ने परिजनों को ऑटो चालक की इस गंदी हरकत की जानकारी दी। पुलिस ने आरोपी राजकुमार कोल (३३) को गिरफ्तार कर लिया है।
मासूम बेटियों से हैवानियत करने वाले इन हैवानों के लिए यह कठोर सजा बड़ा सबक है। न्यायालय का धन्यवाद और आभार। पुलिस का कार्य सराहनीय रहा।
भूपेंद्र सिंह, गृहमंत्री